सिक्किम में लगातार दूसरी बार जनता ने भाजपा को नकारा

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दुर्ग न्यूज, 3 जून। भाजपा और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू सिक्किम में नहीं चल पाया है। उनका पार्टी का कोई भी प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने में सफल नहीं रहा है। 32 सदस्यों वाली विधानसभा में एसकेएम (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) लगातार दूसरी बार बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी ने 31 सीटों पर जीत हासिल की है। इस प्रकार एकमात्र सीट एसडीएफ के खाते में गई। बता दें कि सिक्किम में एसकेएम का वोट प्रतिशत 58 प्रतिशत से ज्यादा रहा। वहीं भाजपा को महज 5 प्रतिशत वोट से ही संतोष करना पड़ा। सिक्किम में मुख्यमंत्री प्रेमसिंह तमांग दो सीटों से चुनाव जीते हैं। सिक्किम में भी 19 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। 2019 में एसकेएम ने 17 सीटें जीती थी। एसडीएफ 15 सीट जीतने में सफल रही थी। इस प्रकार एसकेएम ने रिकार्ड जीत दर्ज की है। यह जीत इसलिए मायने रखती है कि भाजपा ने जहां पूरे देश में उनके पक्ष में माहौल होने का दावा किया। वहीं कांग्रेस ने नार्थ इस्ट से न्याय यात्रा निकाली।

 

पूर्व मुख्यमंत्री चामलिंग हारे

 

सिक्किम में हुए विधानसभा चुनाव में वर्ष 1994 से 2019 तक लगातार 25 साल मुख्यमंत्री रहे एसडीएफ प्रमुख पवन चामलिंग चुनाव हार गए हैं। वहीं भाजपा ने इस बार 31 सीटों पर चुनाव लड़ा। उनका कोई भी प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल नहीं रहा। प्रदेश अध्यक्ष दिल्लीराम थापा भी चुनाव हार गए। 2019 में भी भाजपा का कोई प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता था। 10 विधायक एसडीएफ से दलबदल कर आए थे।

 

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सिक्किम से सटे अरुणाचल प्रदेश में नतीजे एकदम उलट रहे। यहां भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की। अरुणाचल प्रदेश में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। 60 सदस्यों वाली विधानसभा के रविवार को घोषित चुनाव नतीजों में भाजपा ने 46 सीटें जीत कर बहुमत हासिल किया है। 19 अप्रैल को हुए मतदान में भाजपा को 36 सीटों पर जीत मिली। 10 सीटों पर भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। मुख्यमंत्री पेमा खांडू और डिप्टी सीएम चोवना मेन निर्विरोध निर्वाचित होने वाले उम्मीदवारों में शामिल हैं।

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