प्रसव के बाद गंभीर महिला को ब्लड देकर बचाई जान; अस्पताल के ब्लड बैंक में बी- पॉजिटिव ब्लड नहीं था | Life saved by giving blood to a critical woman after delivery; There was no B-positive blood in the blood bank of the hospital.

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बेमेतरा21 घंटे पहले

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जिला अस्पताल में ब्लड डोनेट करते जितेन्द्र वर्मा। - Dainik Bhaskar

जिला अस्पताल में ब्लड डोनेट करते जितेन्द्र वर्मा।

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जिला अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता के शरीर में खून की कमी हो गई थी। डिलीवरी के बाद से वह गंभीर थी। अस्पताल के ब्लड बैंक में भी उसके ग्रुप का ब्लड नहीं था। परिजन ढूंढ-ढूंढकर हार चुके थे। तभी अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कम्प्यूटर ऑपरेटर जितेन्द्र वर्मा ने अपना खून देकर प्रसूता की जान बचाई।

मामला जिला अस्पताल बेमेतरा का है। 5 दिन पहले गर्भवती मोतिम वर्मा को उसके परिजन अस्पताल लेकर आए। उसका एचबी कम था और तत्काल बी- पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी। लेकिन ब्लड बैंक में इस ग्रुप का ब्लड ही नहीं था। ऐसे में परेशान परिजन ने 3 दिन तक ढूंढते हुए किसी तरह एक यूनिट ब्लड की व्यवस्था की। तब कहीं जाकर उसकी डिलीवरी हुई। लेकिन डिलीवरी के बाद फिर खून की कमी से तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी। तभी जिला अस्पताल में एनएचएम के कम्प्यूटर ऑपरेटर जितेन्द्र वर्मा ने उनकी बात सुनी और तुरंत एक यूनिट ब्लड डोनेट कर महिला की जान बचा ली।

महिला के शरीर में केवल तीन ग्राम ही खून बचा था
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि महिला जब भर्ती हुई थी, तब उसके शरीर में केवल 3 ग्राम खून था। उसे बी- पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी। लेकिन ब्लड बैंक में खून नहीं था। महिला 3 दिन से अस्पताल में भर्ती थी, उसे तत्काल रेफर भी नहीं कर सकते थे। क्योंकि खतरा बहुत ज्यादा था। व्यवस्था नहीं होने पर अस्पताल के कर्मचारी ने ब्लड डोनेट कर मदद की। इस संबंध में डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि अब महिला और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

अब तक 14 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं वर्मा
बताया गया कि जितेन्द्र वर्मा इसके पूर्व भी ब्लड डोनेट कर चुके हैं। अब तक उसने 14 जरुरतमंदों को ब्लड डोनेट किया है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को ब्लड डोनेट करते आ रहे हैं। इसके अलावा फोन से सूचना मिलने पर रायपुर, भिलाई सहित अन्य जगहों पर जाकर जरुरतमंदों को ब्लड डोनेट कर चुके हैं। उनके इस सराहनीय पहल की प्रसूता के परिजन सहित विभागीय टीम ने सराहना की। डॉ. शर्मा ने कहा कि रक्तदान करना किसी को जीवनदान देने से कम नहीं है।

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