6 साल में सर्वे तक नहीं- बोर्ड से ग्रीन सिग्नल नहीं, डोंगरगढ़-उस्लापुर रेल लाइन अधर में | Not even survey in 6 years – no green signal from board, Dongargarh-Uslapur rail line in limbo

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राजनांदगांव15 मिनट पहले

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डोंगरगढ़ से उस्लापुर के बीच बनने वाली रेल लाइन अब तक अधर में हैं। रेलवे लाइन की स्वीकृति की घोषणा तो साल 2017 में हो गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका है। इसकी वजह अब तक रेलवे बोर्ड से निर्देश नहीं मिलना बताया जा रहा है। कुछ समय पहले ही इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने 100 करोड़ का प्रावधान किया था, इसके बाद प्रोजेक्ट के शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ भी नहीं हो पाया है। रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए छग रेलवे कार्पोरेशन बनाया गया है।

इसी कार्पोरेशन के माध्यम से पूरा काम होना है। लेकिन इस कार्पोरेशन को अब तक रेलवे बोर्ड से किसी तरह के निर्देश नहीं मिले हैं। इसके चलते रेल लाइन के संबंध में कोई भी काम शुरू नहीं हो सका है। प्रोजेक्ट के स्वीकृति के पहले रेल लाइन के लिए सर्वे किया गया था ,लेकिन इसके बाद कई शिकायतें, विरोध और मांग की स्थिति बनी।

इसी बीच प्रदेश में सरकार भी बदल गई। जिसके बाद नए सिरे से सर्वे करने और कुछ नए स्टेशनों को इसमें जोड़ने की बात प्रदेश सरकार ने कही थी। लेकिन अब तक नए सिरे से सर्वे शुरू हुआ और न ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर कोई कदम उठाया जा रहा है। करीब पांच साल से रेल लाइन का प्रोजेक्ट केवल कागजों पर ही दौड़ रहा है।

केंद्र के पैसे से राज्य सरकार करेगी काम

इस प्रोजेक्ट के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कार्पोरेशन लिमिटेड बनाया गया है। उसके माध्यम से काम शुरू किया गया है। जानकारी मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार पैसा देगी और राज्य सरकार प्रोजेक्ट को पूरा करने का काम करेगी। केंद्र व राज्य के बीच यही एमओयू हुआ था। इसी वजह से राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है। इसके बाद केंद्र की ओर से 100 करोड़ रुपए का प्रावधान भी प्रोजेक्ट के लिए किया गया, लेकिन अब तक इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ भी काम नहीं हो सका है।

राज्य स्तर पर बनाई गई समिति में लोक निर्माण विभाग समेत मुख्य मंत्री सचिवालय से जुड़े अधिकारियों को शामिल किया गया है। प्रोजेक्ट के शुरुआती सर्वे के बाद रुपरेखा तैयार कर ली गई थी, लेकिन इसमें कवर्धा जिले के कुछ अहम क्षेत्र शामिल नहीं थे, इसके चलते ग्रामीणों व स्थानीय नेताओं ने इसका विरोध शुरु किया। रेल लाइन में छूटे हुए हिस्सों को शामिल करने के लिए सीएम भूपेश बघेल से भी मुलाकात क्षेत्रीय लोगों की थी।

मालगाड़ियों के लिए नया रास्ता बनेगा

रेलवे के अफसरों ने बताया कि इस रेल लाइन के पूरा होने के बाद मालगाड़ियों के लिए नया रुट बनेगा। अधिक से अधिक संख्या में मालगाड़ी इस रुट से आगे बढ़ सकेंगी। इससे वर्तमान की नागपुर – बिलासपुर रेल लाइन से ट्रैफिक का दबाव भी कम होता। रेल प्रोजेक्ट से संबंधित क्षेत्र के विकास को भी जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब तक प्रोजेक्ट को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। इससे प्रोजेक्ट के और भी देर होने की संभावना बनी हुई है।

बोर्ड के निर्देश के बाद ही कार्पेारेशन अपना काम शुरू करेगी। लेकिन यह कब तक होगा, कोई भी स्पष्ट नहीं कर पा रहा है। प्रोजेक्ट को लेकर बिलासपुर मंडल के सीपीआरओ साकेत रंजन ने बताया कि अब तक बोर्ड से किसी तरह के निर्देश नहीं मिले हैं, इसके चलते प्रकिया शुरू नहीं हो सकी है। बोर्ड से मिलने वाले निर्देश के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

लंबे समय से है मांग, 270 किमी की लाइन प्रस्तावित
डोंगरगढ़ से खैरागढ़, कवर्धा होते हुए बिलासपुर जाने वाली नई रेल लाइन की दूरी 270 किलोमीटर प्रस्तावित है। इस मार्ग में छुई खदान, गंडई, नंदिनी, अहिवारा, बेरला, बेमेतरा, थान खम्हरिया, कवर्धा, पंडरिया, घुटकू, उस्लापुर समेत अन्य शहर और गांव आएंगे। इससे यहां रहने वाले लोगों को एक सस्ती परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद थी, इनमें से ज्यादातर हिस्से में अब तक रेल लाइन नहीं पहुंच सकी है। इससे लोगों में भी उत्साह बना हुआ था। लेकिन प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में जाने की वजह से अब लोग भी निराश होने लगे हैं। लंबे समय से इस रेल लाइन की मांग की जा रही थी।

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