
० शहीद गैंद सिंह नायक को बताया स्वाधीनता आंदोलन का प्रथम शहीद

० गोकुल नगर पुलगांव में हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित सामाजिक मिलन एवं शक्ति दिवस समारोह में हुए शामिल
० समाज के युवा-युवतियों को आवासीय कोचिंग सुविधा प्रदान करने 50 लाख तथा पुलगांव दुर्ग स्थित कंवर सामाजिक भवन में बाउण्ड्रीवॉल हेतु 25 लाख की घोषणा

दुर्ग। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र व समाज के नवनिर्माण में आदिवासी नायकों एवं महापुरूषों का अनुपम एवं अद्वितीय योगदान है। उन्होंने कहा कि हल्बा, हल्बी एवं आदिवासी समाज सहित संपूर्ण भारत वर्ष के गौरव शहीद गैंद सिंह नायक ने हमारे देश में आजादी के आंदोलन का सर्वप्रथम शंखनाद किया था। श्री साय ने कहा कि देश में स्वाधीनता आंदोलन की शुरुआत 1857 से मानी जाती है। लेकिन उससे पूर्व आदिवासी जन नायकों एवं वीर सपूतों ने देश में स्वाधीनता के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था। मुख्यमंत्री श्री साय आज जिला मुख्यालय दुर्ग के गोकुल नगर स्थित हल्बा शक्ति स्थल में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित 35वॉं मिलन समारोह एवं शक्ति दिवस पर्व के अवसर पर अपने उद्गार व्यक्त किए। श्री साय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में दुर्ग सांसद विजय बघेल, छत्तीसगढ़ प्रदेश राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष ललित चन्द्राकर, दुर्ग महापौर श्रीमती अलका बाघमार, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज के प्रदेश अध्यक्ष मंथीर राम खलेन्द्र, महासभा अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र महला, केन्द्रीय अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आरएस नायक, जिला अध्यक्ष आईआर देहारी सहित अन्य अतिथि एवं समाज प्रमुखगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के पश्चात सर्वप्रथम मुख्यमंत्री ने समाज की अधिष्ठात्री देवी माता दन्तेश्वरी की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम स्थल में हल्बा-हल्बी समाज के नवनिर्मित कार्यालय का फीता काट कर लोकार्पण किया। श्री साय ने शक्ति स्थल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हल्बा समाज के युवा-युवतियों को आवासीय कोचिंग सुविधा प्रदान करने हेतु 50 लाख रूपए तथा पुलगांव स्थित कंवर सामाजिक भवन में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण हेतु 25 लाख रूपए की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने हल्बा-हल्बी समाज के सामाजिक पत्रिका ’समाज’ का भी विमोचन किया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने माता दन्तेश्वरी, शीतला माता एवं अमर शहीर गैंद सिंह नायक को नमन करते हुए अपने उद्बोधन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने सभी स्वजातीयजनों को शक्ति दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए माता दन्तेश्वरी से हल्बा-हल्बी समाज चहुमुंखी विकास एवं प्रगति की मंगल कामना की। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश में आजादी के आंदोलन का सूत्रपात सर्वप्रथम जनजातीय समाज के महापुरूषों ने किया था। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंद सिंह नायक सहित जनजाति नायकों एवं देशभक्तों ने अंग्रेजों के खिलाफ विभिन्न 14 क्रांतियों का शंखनाद किया था। इस अवसर पर उन्होंने जनजाति समाज के हितों की रक्षा एवं उनके संरक्षण व संवर्धन हेतु पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्व. वाजपेयी द्वारा जनजाति बहुल में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास हेतु वर्ष 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया गया था। श्री साय ने जनजाति के समाज के लोगों को राजधानी रायपुर में निर्मित जनजाति संग्रहालय का अनिवार्य रूप से अवलोकन करने को कहा।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज देश के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आदिवासी समाज की महिला श्रीमती द्रौपती मुर्मू विराजमान है। इसके अलावा मेरे जैसे गांव के एक साधारण आदिवासी कार्यकर्ता को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। इस अवसर पर श्री साय ने छत्तीसगढ़ सरकार के पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में राज्य में हुए उल्लेखनीय विकास कार्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास, धान प्रति क्विंटल 3100 रूपए की दर से खरीदने, महतारी वंदन योजना, तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 5500 रूपए मानक बोरा के हिसाब से भुगतान की जानकारी दी। उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ राज्य सेवा एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने हेतु पीएससी घोटाले जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा छत्तीसगढ़ राज्य प्राकृतिक एवं वन संसाधनों से परिपूर्ण एक शांति प्रिय राज्य है। श्री साय ने कहा पिछले वर्षों से नक्सलवाद राज्य के विकास में सबसे बड़ा बाधक साबित हो रहा था। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। केन्द्र सरकार के सक्रिय सहयोग के फलस्वरूप अब तक राज्य के कुल 400 गांव नक्सलवाद से मुक्त हो चुके हैं। इन गांव में निवासरत् लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने हेतु इन क्षेत्रों की विकास की गंगा बाहाई जा रही है। निश्चित रूप से इसके माध्यम से बस्तर संभाग के पूरे सात जिलों में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। इस अवसर पर श्री साय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा देश के चहुंमुखी विकास हेतु किये जा रहे कार्यों के संबंध में जानकारी दी। श्री साय ने राष्ट्र व समाज के विकास के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा अस्त्र बताते हुए सभी समाज प्रमुखों को आगामी पीढ़ी को शिक्षित एवं ज्ञानवान बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लेकर इसे अमलीजामा पहनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम को सांसद विजय बघेल, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं अतिथियों के द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले समाज सेवकों एवं उनके परिजनों का सम्मान भी किया गया। समारोह में संभागायुक्त एसएन राठौर, आईजी आरजी. गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित समाज प्रमुखों के अलावा बड़ी संख्या में हल्बा-हल्बी समाज के लोग उपस्थित थे।
