दुर्ग निगम कमिश्नर ने कर्मचारी से फल-चावल मंगाये नहीं लाने पर लटक रही कार्रवाई की तलवार, मामला पंहुचा हाईकोर्ट 

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दुर्ग नगर निगम के आयुक्त सुमित अग्रवाल बुरे फंस गए हैं। उनके खिलाफ निगम के ही कर्मचारी भूपेंद्र गोईर ने हाईकोर्ट में परिवाद दायर किया है, जिसमें कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दुर्ग नगर निगम के कर्मचारी भूपेंद्र गोइर और कमिश्नर सुमित अग्रवाल के बीच हुए कथित वाट्सएप चैट सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। याचिका में दावा किया गया है कि कमिश्नर ने कर्मचारी से फल लाने, डीटीएच रिचार्ज कराने, जवाफूल चावल लाने से लेकर कॉर्नर सीट वाली मूवी टिकट बुक कराने जैसे निजी काम कराए। अब इसी कर्मचारी को नौकरी से बाहर करने फाइल तैयार कर ली गई। पीड़ित कर्मचारी ने वाट्सएप चैट पेश कर हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। जस्टिस पीपी. साहू की सिंगल बेंच ने इस पर कर्मचारी के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर 23 फरवरी तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य शासन और निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता भूपेंद्र गोइर दुर्गं नगर निगम में असिस्टेंट ग्रेड-3 हैं। याचिका के साथ वाट्सएप चैट्स के स्क्रीनशॉट हाई कोर्ट में पेश किए गए हैं।

हाई कोर्ट में पेश दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि कमिश्नर सुमित अग्रवाल ने कर्मचारी से कई बार निजी फरमाइश की, इसमें लाल अंगूर, सेब, संतरा समेत कई फल, 10 किलो जवाफूल चावल, मूवी की टिकट, गैस सिलेंडर, बंगले के लिए एसी समेत कई मांग की। इसके अलावा एमआईसी को स्थगित करने पर भी सवाल पूछे। इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी के लिए लिखा कि उसे समझा देना, हटा दूंगा। एमआईसी की बैठक कैंसिल करने को लेकर भी कर्मचारी से सलाह मांगी।

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कर्मचारी से एसी की फाइल बढ़ाने को कहा अनार, संतरा, सेब सब 1-1 किलो तुरंत पावरहाउस से लाने को कहा। एयरटेल डीटीएच रिचार्ज करने को कहा। पूछा-वसूली के लिए कब निकलना है, 4 बजे निकलने की सूचना देने पर ओके कहा।

कर्मचारी का दावा- मांग पूरी नहीं करने पर कार्रवाई

दरअसल, कर्मचारी की नियुक्ति 2014 में चपरासी के पद पर हुई थी, जिसे 2019 में सहायक ग्रेड-3 बनाया गया। 31 जुलाई 2025 को कमिश्नर ने उसे कुछ नियुक्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए नोटिस दिया। उस पर आरोप है कि प्यून नम्रता रक्सेल और सहायक राजस्व निरीक्षक प्रीति उज्जैनवार की नियुक्ति और सहायक लेखा अधिकारी रमेश कुमार शर्मा की पदोन्नति अवैध तरीके से की गई थी। जवाब में कर्मचारी ने सक्षम प्राधिकारी, तत्कालीन आयुक्त के समक्ष मामला रखा। वह सिर्फ फाइल पुट-अप करने वाला क्लर्क था, निर्णय उच्च अधिकारियों के थे।

पदस्थापना के बाद से ही सुमित अग्रवाल चर्चा में

दुर्ग निगम में नियुक्ति के बाद से सुमित अग्रवाल चर्चा में रहे हैं। अपने आपको हमेशा निष्पक्ष और ईमानदार बताने का प्रयास किया। हालांकि महापौर से उनकी नोंकझोंक और विवाद की खबरें आते रही। कई कामों के मामलों में कमीशन को लेकर भी चर्चाएं सामने आईं। हर बार मामला शांत हो गया। इस बार सुमित बुरी तरह फंस गए हैं। यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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