
– लापरवाही, निकम्मेपन और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई अमृत मिशन योजना

नरेश सोनी
दुर्ग। डेढ़ सौ करोड़ की अमृत मिशन योजना दुर्ग शहर में लगभग फेल हो गई है। जिन पुनीत उद्देश्यों को लेकर यह योजना धरातल पर उतारी गई, उसे भ्रष्टाचार की प्यासी जीभ लगातार चाटती चली गई। पहले भाजपा और उसके बाद कांग्रेस के जिम्मेदार लोगों ने अमृत मिशन पर इतनी चोंच मारी कि पूरा अमृत, शहर के लिए जहर बन गया। अब भ्रष्टाचार के भूखे भेडिय़ों को अमृत मिशन फेस-२ में भी संभावनाएं दिखी है। योजना का आधे से ज्यादा काम बाकी है, लेकिन अपने-अपने हिस्से लेकर किनारे हो जाने वाले लोग सौ रूपए में कनेक्शन देकर अपनी पीठ थपथपाते नहीं अघा रहे।

नगर निगम क्षेत्र के कुल ६० वार्डों के लिए १५० करोड़ की अमृत योजना तैयार की गई थी। इस योजना के तहत दर्जनभर टंकियों का निर्माण कराया गया। इसका काम इसी साल अप्रैल में पूरा हुआ तो लगे हाथ इसका लोकार्पण भी करवा लिया गया, लेकिन लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पाया। वर्तमान में आधे से ज्यादा शहर पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। जो नल कनेक्शन घरों में दिए गए हैं, उनमें पानी की बजाए बिगूल बज रहा है, जिसकी आवाज सुनकर बच्चे खुश हो रहे हैं। निगम के सूत्रों के मुताबिक, शहर में कुल करीब साढ़े ३०० किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन बिछाई गई है। इसके अलावा रायपुरनाका में नया फिल्टर प्लांट भी बनाया गया। निगम के नलघर स्थित फिल्टर प्लांट (११ एमएलडी) से भी कथित तौर पर जलापूर्ति हो रही है। ६ साल पहले बने ४२ एमएलडी प्लांट से भी टंकियों में जलापूर्ति की जा रही है। इसके अलावा ३ अन्य प्लांट से पूरे शहर को करीब ७७ एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है। ऐसे में सवाल यह है कि जब शहर को इतने व्यापक पैमाने पर पानी की आपूर्ति हो रही है तो शहरवासी पानी को क्यों तरस रहे हैं?
जानकारों की मानें तो शिवनाथ नदी से भिलाई, रिसाली और चरोदा नगर निगम क्षेत्रों को पानी मिल रहा है और इन सभी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था सुचारू चल रही है। सवाल है कि आखिर नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता आने के बाद ऐसा क्या हो गया कि शहर को पानी की गम्भीर समस्या से जूझने को विवश होना पड़ा? बताते हैं कि पूर्व में शिवनाथ नदी तट पर २५० एचपी की ६ मोटर लगी थी, इन्हें निकालकर इसकी जगह ५० एचपी की मोटर लगा दी गई। इसी वजह से टंकियों में पानी नहीं भर रहा है। वर्तमान में नगर निगम की तथाकथित जिम्मेदार व्यवस्था १०० एचपी की मोटर लगाने की तैयारी में है। इसके लिए शासन से बजट भी मांगा गया है। इसमें करीब ३ करोड़ की लागत आने की खबर है।
२२ हजार घरों में नल कनेक्शन
जानकार बताते हैं कि अब तक शहर के कुल करीब २२ हजार घरों में अमृत मिशन योजना के तहत नल का कनेक्शन दिया गया है। जबकि इससे कहीं ज्यादा करीब ३० हजार घरों में कनेक्शन दिया जाना बाकी है। इसके अलावा जो पुराने कनेक्शन चल रहे हैं, उन्हें नए कनेक्शन में शिफ्ट भी करना है। शहरवासी पूरी गर्मी पानी के लिए त्राहिमाम करते रहे, अब जबकि बरसात लग चुकी है तो संभावना है कि लोगों को अगले ४ महीनों तक राहत के आसार भी नहीं है। बताया जाता है कि १०० रूपए लेकर और एक फार्म फरवाकर लोगो को कनेक्शन दिया गया। नागरिकों के समक्ष यह प्रचारित किया गया कि यह मुफ्त कनेक्शन है, जबकि प्रत्येक नगरीय निकाय क्षेत्रों में, जहां अमृत मिशन योजना के तहत कनेक्शन दिया गया, उनसे करीब ७००० रूपए लिए जाने हैं। वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग नागरिकों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि नल का कनेक्शन मुफ्त देने का कहीं कोई प्रावधान ही नहीं है।
६ मीटर भरनी चाहिए टंकियां
बताया जाता है कि अमृत मिशन के तहत बनाई गई टंकियों में पानी नहीं भर पाने की वजह से ही शहरवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद शिवेन्द्र परिहार के मुताबिक, जब तक टंकियों में कम से कम ६ मीटर लेबल तक पानी नहीं भरेगा, तब तक जलापूर्ति सामान्य व सुचारू होने की संभावना नहीं है। वे कहते हैं,- नगर निगम के अफसर कभी इस टंकी तो कभी उस टंकी के जरिए टोपियां ट्रांसफर कर रहे हैं। जबकि उन्हें शिद्दत से समस्या को दूर करनी की कोशिश करनी चाहिए। विभिन्न वार्डों से आई जानकारियां बताती है कि अमृत मिशन योजना से पहले तक शहरवासियों को बराबर और लगातार पानी आपूर्ति होती थी, किन्तु इस योजना के आने के बाद पूरा शहर पानी को तरसने लगा। माना जा सकता है कि गर्मियों में ज्यादा जरूरत होने की वजह से पानी की किल्लत हो, किन्तु अब बरसात में भी यदि समस्या बरकरार है तो यह स्पष्ट है कि अमृत मिशन योजना अपने उद्देश्य को साकार करने में नाकाम रही है।
फेस-२ के लिए २८ करोड़ का प्रोजेक्ट
यह विडंबना ही है कि जो योजना अपने पहले चरण में ही नाकाम रही, उसके लिए नगर निगम के अफसर द्वितीय फेस की योजना तैयार किए गए हैं। द्वितीय फेस की यह योजना करीब २८ करोड़ की है। बताते हैं कि इसके तहत काम भी शुरू कर दिया गया। इससे पहले शासन को फेस-२ प्रोजेक्ट का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके तहत शहर में ३ नई पानी की टंकियां बनाई जानी है। इसके अलावा जो क्षेत्र अमृत मिशन योजना से अब तक अछूते हैं, वहां पाइप लाइप भी बिछाई जानी है।
उद्देश्य, जो हासिल नहीं हो सकता
अमृत मिशन योजना अपनी उपयोगिता को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। इसके लिए नगर निगम की भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था पूरी तरह से जिम्मेदार है। इसके अलावा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेहास्पद है। अमृत मिशन योजना का उद्देश्य था कि इससे शहर का कायाकल्प होगा। लोगों को पेयजल की सुलभ व्यवस्था होगी। वंचित इलाकों में जलापूर्ति सामान्य होगी। गरीबों के साथ ही अक्षम लोगों को भी पानी की उपलब्धता घर पर ही हो सकेगी। इस आधार पर देखें तो यह योजना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में पूर्णत: असफल रही है। वैसे, इस योजना में वर्षाजल संग्रहण, जलाशयों का पुनरूद्धार और सिवरेज प्रबधन भी शामिल है, जिस ओर नगर निगम के जिम्मेदार लोगों का ध्यान ही नहीं है।
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