छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, अस्पताल में थे भर्ती

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे और अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने पटना में बीती रात अंतिम सांस ली। कार्डियक समस्या के बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज चल रहा था। विश्वरंजन 1973 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।

विश्वरंजन जी का व्यक्तित्व विरोधाभासों का एक ऐसा सुंदर संगम था, जहाँ एक ओर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की गहरी रणनीतियाँ थीं, तो दूसरी ओर मशहूर शायर फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय) के नाती होने का वह काव्य संस्कार, जिसने उन्हें ‘स्वप्न का होना बेहद ज़रूरी’ जैसा बोध दिया।

उन्होंने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के उज्जैन, ग्वालियर, बस्तर और रायपुर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएँ दीं।

भारत सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने गुजरात और बिहार में आंतरिक सुरक्षा के मोर्चों को संभाला।

उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया, जो उनके कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है।

साहित्यिक अवदान और आलोचनात्मक दृष्टि

विश्वरंजन जी केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे गंभीर अध्येता थे जिन्होंने अज्ञेय, शमशेर बहादुर सिंह, नागार्जुन और प्रमोद वर्मा जैसे शिखर पुरुषों पर महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कार्य किया।

उनके कविता संग्रह ‘स्वप्न का होना बेहद ज़रूरी’ और ‘आती है बहुत अंदर से आवाज़’ इंसानी जद्दोजहद और आंतरिक शांति के दस्तावेज़ हैं। उनकी कविताओं का अनुवाद तेलुगु, अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में होना उनकी वैश्विक पहुँच को दर्शाता है।

वे केवल लिखते नहीं थे, बल्कि पेंटिंग और फोटोग्राफी के माध्यम से भी दुनिया को एक कलाकार की नज़र से देखते थे।

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एक ऐसे समय में जब सत्ता और संवेदना का साथ मिलना कठिन होता है, विश्वरंजन जी ने दिखाया कि एक पुलिस महानिदेशक के पद पर रहते हुए भी कैसे एक कवि का हृदय सुरक्षित रखा जा सकता है।

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