
रायपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ के पांच जिलों, विशेषकर कोरबा में ‘फ्लोरामैक्स’ (Flora Max) कंपनी द्वारा किया गया अरबों रुपये का घोटाला अब राष्ट्रीय स्तर पर गूंज रहा है। नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (NRLM) और स्व-रोजगार के नाम पर करीब 40,000 आदिवासी महिलाओं को ठगी का शिकार बनाने के इस मामले में केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने इस विषय पर मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को दिल्ली तलब किया है।

क्या है पूरा ‘फ्लोरामैक्स’ घोटाला?
कंपनी ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और मासिक ‘सैलरी’ देने का झांसा दिया। इसके लिए महिलाओं को 45 से अधिक माइक्रो फाइनेंस कंपनियों और बैंकों से 30–30 हजार रुपये का लोन दिलवाया गया।

महिलाओं के खाते में लोन की राशि आते ही उसे कंपनी में ‘निवेश’ के नाम पर जमा करा लिया गया। बदले में उन्हें घटिया दर्जे का कुछ सामान दिया गया।
कुछ महीनों तक कंपनी ने लोन की किस्तें भरीं, लेकिन फिर दफ्तर बंद कर अधिकारी फरार हो गए। अब बैंक और रिकवरी एजेंट इन गरीब महिलाओं पर कर्ज चुकाने का दबाव बना रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में भारी आक्रोश है।
अब तक की कार्रवाई
पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत पर केंद्रीय जनजाति आयोग ने मामले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट संतोषजनक नहीं होने पर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया है।
पुलिस अब तक कंपनी के डायरेक्टर अखिलेश सिंह समेत 13 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन घोटाले की विशालता को देखते हुए मास्टरमाइंड्स की संपत्तियों के कुर्की की मांग की जा रही है।
करोड़ों की गड़बड़ी
शुरुआती जांच में यह घोटाला 120 करोड़ रुपये से अधिक का आंका गया है, लेकिन पीड़ितों की संख्या को देखते हुए यह आंकड़ा 500 करोड़ रुपये तक जा सकता है।
