महासमुंद में मिले डायमंड: खनिज से मिले 5 हीरे, छत्तीसगढ़ बन सकता है देश का नया डायमंड हब

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रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से देश के खनिज क्षेत्र के लिए बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। सरायपाली क्षेत्र के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान 200 टन खनिज सामग्री की प्रोसेसिंग से पांच हीरे प्राप्त हुए हैं। इनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। विशेषज्ञ इसे क्षेत्र में बड़े हीरा भंडार मिलने के मजबूत संकेत के रूप में देख रहे हैं।

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एनएमडीसी और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) की संयुक्त कंपनी एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड ने इस महत्वपूर्ण खोज की आधिकारिक पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, जियोफिजिकल सर्वे और 500 मीटर गहरी एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग के बाद संभावित हीरा क्षेत्र की पहचान की गई थी।

इसके बाद 200 टन खनिज सामग्री को मध्यप्रदेश के पन्ना स्थित डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया, जहां परीक्षण के दौरान पांच हीरे प्राप्त हुए। 22 जून को जारी आधिकारिक पत्र में कंपनी ने इस खोज की पुष्टि की।

दो जेम क्वालिटी हीरे भी मिले

पांच हीरों में दो उच्च गुणवत्ता (Gem Quality) के सफेद हीरे शामिल हैं, जिनका वजन क्रमशः 0.19 और 0.06 कैरेट है। इसके अलावा एक 0.32 कैरेट का पीला हीरा तथा दो भूरे रंग के हीरे 0.59 और 0.06 कैरेट वजन के पाए गए हैं।

खनिज विशेषज्ञों के मुताबिक किसी नए हीरा क्षेत्र में शुरुआती चरण में जेम क्वालिटी हीरों का मिलना बेहद सकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हीरा भंडार होने की संभावना और मजबूत हो जाती है।

पन्ना के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखे गए हीरे

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कंपनी ने बताया कि एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के पास हीरों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसलिए सभी पांचों हीरों को एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित जमा करा दिया गया है।

क्या होते हैं जेम क्वालिटी हीरे ?

जेम क्वालिटी हीरे सबसे उच्च श्रेणी के हीरे माने जाते हैं। इनका उपयोग आभूषण निर्माण में किया जाता है। इनमें उत्कृष्ट चमक, पारदर्शिता और बेहतर रंग गुणवत्ता होती है। इसके विपरीत नॉन-जेम हीरे मुख्य रूप से औद्योगिक कार्यों और कटिंग टूल्स में इस्तेमाल किए जाते हैं।

रोजगार और निवेश की नई संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए हीरा क्षेत्र की पहचान छोटे नमूनों से ही शुरू होती है। इसलिए पांच हीरों की यह खोज भले संख्या में छोटी दिखाई दे, लेकिन भू-वैज्ञानिक दृष्टि से इसका महत्व बेहद बड़ा है। इससे भविष्य में विस्तृत सर्वेक्षण और व्यावसायिक खनन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है, लेकिन कच्चे हीरों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में हुई यह खोज आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती दे सकती है।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महासमुंद में हीरों की प्राप्ति राज्य की समृद्ध खनिज संपदा का प्रमाण है। यह खोज विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगी।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड ने आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह खोज छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में ला सकती है।

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