नामीबिया से आई मादा चीता सियाया ने चार शावकों को दिया जन्म, चीतों का कुनबा बढ़ा, मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आई बड़ी खुशखबरी

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श्योपुर, 29 मार्च। नामीबिया से आई मादा चीता सियाया ने चार शावकों को जन्म दिया है। जानकारी के अनुसार मादा चीता और चारों नन्हे मेहमान फिलहाल बिल्कुल स्वस्थ हैं। एक विशेष टीम नए मेहमानों और मादा चीता का खास ख्याल रख रही है। चीता संरक्षण परियोजना में शामिल अधिकारियों ने नये मेहमानों के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि शावकों का जन्म एक सकारात्मक संकेत है कि कूनो नेशनल पार्क में चीते अपने नए वातावरण में अच्छी तरह से ढल रहे हैं। पार्क को भारत की वन्य जीव आबादी में चीतों के पुन: प्रवेश के लिए एक उपयुक्त आवास के रूप में तैयार किया जा रहा है। ज्ञात हो, पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने 72वें जन्मदिवस के मौके पर एमपी के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को छोड़ा था, जिनमें पांच नर और तीन मादा चीता शामिल थी।

मादा चीता ‘साशा’ की मौत

उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व ही पालपुर-कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘साशा’ के मौत की खबर आई थी। गुर्दों में संक्रमण होने की वजह से उसकी मृत्यु हो गई। इस मादा चीता के गुर्दों में संक्रमण भारत आने के पहले से ही था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य-प्राणी जेएस चौहान ने बताया था कि चीता के स्वास्थ्य की देख-रेख के लिए तैनात तीन पशु चिकित्सक द्वारा मादा चीता के स्वास्थ्य परीक्षण में उपचार की आवश्यकता पाई गई थी। फलस्वरूप उसी दिन उसे क्वारेंटाइन बाड़े में लाया गया। चीता का स्वास्थ्य परीक्षण वन विहार राष्ट्रीय उद्यान स्थित लैब में अत्याधुनिक मशीनों से किया गया। खून के नमूनों की जांच से यह जानकारी प्राप्त हुई कि साशा के गुर्दों में संक्रमण है।

चौहान ने बताया कि भारतीय वन्य जीव-संरक्षण देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और कूनों राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा चीता कंजर्वेंशन फाउडेंशन, नामीबिया से ‘साशा’ के ट्रीटमेंट की हिस्ट्री प्राप्त होने पर ज्ञात हुआ कि 15 अगस्त 2022 को नामीबिया में खून के नमूने की गई अंतिम जांच में भी क्रिएटिनिन का स्तर 400 से अधिक पाया गया था, जिससे यह पुष्टि हुई है कि साशा को गुर्दे की बीमारी भारत आने के पहले से ही थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि 22 जनवरी 2023 से ‘साशा’ की मृत्यु तक कूनो राष्ट्रीय उद्यान के सभी वन्य प्राणी चिकित्सकों और नामीबियाई विशेषज्ञ डॉ इलाई वॉकर द्वारा लगातार दिन-रात परीक्षण कर उपचार किया गया।

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