
दुर्ग न्यूज, 3 जुलाई। दुर्ग जिले में सरकारी नौकरी के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जिला एवं सत्र न्यायलय दुर्ग ने फैसला सुनाते हुए सहायक खनिज अधिकारी को 7 साल कारावास व 20000 रूपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश आदित्य जोशी की अदालत में सुनाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक जाहिदा परवीन ने मामले की पैरवी की थी। सजायाफ्ता की ओर से अधिवक्ता तारेंद्र जैन ने जोरदार बचाव बहस की लेकिन माइनिंग अधिकारी के विरुद्ध मजबूत साक्ष्यों के चलते आरोपी को दोष सिद्ध होने से नहीं बचा सके।

आपको बता दें कि यह मामला 2010 का है। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की गुप्त सूचना के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने दुर्ग के विजय नगर निवासी सहायक खनिज अधिकारी गणेश कुमार कुम्हारे के निवास पर 11 अक्टूबर 2010 को दबिश दी थी। तत्कालीन डीएसपी लोचन पांडेय के नेतृत्व में यह दबिश दी गई थी। इस बीच में गणेश कुमार द्वारा 1 जनवरी 2004 से 12 अक्टूबर 2010 तक 6 साल की शासकीय नौकरी के दौरान 2 करोड़ 20 लाख 51हज़ार 378 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था।
टीम ने मुजरिम गणेश कुमार कुम्हारे के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर प्रकरण को विचारण के लिए अदालत में पेश किया था। मामले में 21 दिसंबर 2016 को पहली बार सुनवाई हुई थी। प्रकरण में विचारण के बाद स्पेशल कोर्ट ने 28 जून 2023 को अभियुक्त सहायक खनिज अधिकारी गणेश के खिलाफ एक करोड़ 48 लाख 10 हज़ार 308 रुपए की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया, जिसके बाद न्यायाधीश ने अभियुक्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) ई तथा 13 (2 ) के तहत दोषी करार देते हुए 7 वर्ष कठोर कारावास के साथ 20 हजार के अर्थदंड से दंडित किए जाने का फैसला सुनाया।

मामले में सरकारी वकील जाहिदा परवीन ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के ठोस प्रमाण थे और पुलिस ने अच्छी तरह से विवेचना करने के पश्चात विचारण में उपयोगी महत्वपूर्ण साक्ष्य योग्य सामग्री अपने इन्वेस्टिगेशन के दौरान उम्दा साक्ष्य सामग्री जुटाकर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया था। इस वजह से बचाव पक्ष की एक न चली और आरोपी को सजा दिलाई जा सकी। परवीन ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि पुलिस यदि किसी मामले में पूरी संजीदगी से अन्वेषण कर साक्ष्य सामग्री एकत्रित कर चालान पेश कर दे, तब न्यायालय में आरोपी का बचाव लगभग असंभव हो जाता है।
