लोकतंत्र के लिए खतरा बनी ED, छापेमारी की कार्रवाई चुनाव देखकर हो रही : भूपेश बघेल, मुख्यमंत्री की पत्रकारों से चर्चा

Share this

दुर्ग न्यूज, 28 अगस्त। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस लाईन हेलीपैड पर पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि सरगुजा में भाजपा के प्रभारी ओम माथुर ने ईडी की कार्यवाही पर कहा “अभी चुनाव आते तक देखिये क्या-क्या होता है”। भाजपा प्रभारी का यह बयान यह साबित करने के लिये पर्याप्त है कि भाजपा ईडी के बलबूते चुनाव लड़ेगी? ईडी की कार्यवाही चुनाव को देखकर हो रही है। एक विभाग में गड़बड़ी नहीं पकड़ पाते दूसरे में लग जाते हैं। कोल, आबकारी, माईनिंग डी.एम.एफ. चावल अब सुना है जल जीवन मिशन बिना किसी ठोस आधार के राज्य सरकार के सभी विभागों पर कार्यवाही यह साबित करने के लिये छत्तीसगढ़ में हर जगह गड़बड़ी हैं, यह चुनावी हथियार है। इसको हम जनता के बीच लेकर जायेंगे।

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-2.jpeg

छत्तीसगढ़ में पिछले एक वर्ष में ईडी. और आईटी. अधिकारियों ने 200 से भी अधिक व्यक्तियों/संस्थाओं तथा शासकीय कार्यालयों में छापेमारी की है। ईडी. के अधिकारियों द्वारा दमन और प्रताड़ना को हथियार बनाकर बिना चल-अचल संपत्ति की रिकवरी के झूठे बयानों के आधार पर सैकड़ों करोड़ के कथित कोयला घोटाला, शराब घोटाला, चावल घोटाला तथा अब महादेव एप्स घोटाला होने का दुष्प्रचार किया जा रहा है।

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-1.jpeg

 

लोकतंत्र के लिये खतरा बनी ईडी

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनी लांड्रिंग के कानून में इस तरह से बदलाव किये हैं जिससे ईडी अधिकारियों को असीमित अधिकार मिल गये हैं। ईडी अफसर जिसको चाहे सिर्फ आरोपों के आधार पर गिरफ्तार कर सकते हैं तथा उस पर भी विडंबना यह है कि मनी लांड्रिंग के कानून अंतर्गत गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत मिलने के प्रावधान भी एक तरह से समाप्त कर दिये गये हैं। ईडी अधिकारी बिना कारण बताये कोई भी संपत्ति अटैच कर सकते हैं तथा उसके बाद वर्षों तक उसके छूटने की कोई संभावना नहीं रहती।

READ MORE  कहा-'शदाणी दरबार के प्रवचनों से वहां के हिंदुओं को मिलता है आत्मबल;सनातन धर्म के साथ ही निष्ठा' | Group of Hindu pilgrims returned from Pakistan, said- 'The Hindus there get self-strength from the discourses of Shadani Darbar'

ईडी अधिकारियों के लिये यह भी बायें हाथ का खेल है कि किसी भी गवाह से उसे जेल भेजने की धमकी देकर मनचाहा बयान लिखवा लिया जाता है।

 

ईडी अधिकारियों के समक्ष हुए बयान का सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने हुये बयानों जितनी ही अहमियत है। गवाह को यह कहकर धमकाया जाता है कि वह या तो ईडी अधिकारियों द्वारा तैयार किये गये बयान अथवा झूठी कहानी की पुष्टि अपने बयान में करें अन्यथा उसे जेल भेज दिया जायेगा, जहां उसे जिंदगी भर जेल में सड़ना पड़ेगा। गवाहों की क्रूर पिटाई, उनसे गाली गलौज ईडी अधिकारियों के लिये सामान्य बात है। गवाह यदि ईडी. अधिकारियों का कहना नहीं मानते तो उसके परिवार जनों को अरेस्ट करने की धमकी देकर मनचाहा बयान लिखवा लिया जाता है। ईडी अधिकारियों द्वारा इस षड्यंत्र की पूर्ति के लिये गवाहों के बच्चों, भाईयों, माता-पिता तथा पत्नियों को समन किया जाता है। उन्हें रात-रात भर ईडी कार्यालय में रखकर भयभीत एवं प्रताड़ित किया जाता है। ईडी अधिकारी जिसे चाहे गवाह बना सकते हैं तथा किसी को भी अभियुक्त। ईडी अधिकारियों की असीमित शक्तियों एवं प्रताड़ना के बारे में वर्णित उक्त तथ्य शब्दशः सही हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी संस्था को निरंकुश बनाने तथा नागरिक अधिकारों का इस कदर हनन देश के लिये सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चुका है।

 

महत्वपूर्ण बिंदु –

 

1. महादेव एप घोटाला – महादेव ऐप तथा अन्य अनेक ऑनलाइन गेमिंग एप पूरे देश में चल रहे हैं। भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ईडी. द्वारा क्यों कार्यवाही नहीं की जा रही है। जब छत्तीसगढ़ में आंध्र प्रदेश की एफआईआर के आधार पर कार्यवाही हो रही है तो देश के किसी भी राज्य में किसी एफआईआर के आधार पर कार्यवाही की जा सकती है। यह उल्लेखनीय है कि सरकार के विशेष प्रयासों के कारण ही महादेव एप्स से संबंधित अनेक दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा सैकड़ों करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश किया गया। महादेव एप् घोटाले में भाजपा के अनेक शक्तिशाली व्यक्ति शामिल हैं। ईडी द्वारा भाजपाइयों को बचाने के षड्यंत्र की आड़ में मेरे निकट सहयोगियों एवं घोटाले का पर्दाफाश करने वाले पुलिस अधिकारियों को फंसाने का षड्यंत्र किया जा रहा है।

READ MORE  महतारी वंदन योजना : आधार सीडिंग करवाने का आज अंतिम दिन

 

2. शौचालय घोटाला – राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य कार्यक्रम – 5 में यह जानकारी दी गयी है कि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 73.5 प्रतिशत लोगों के पास शौचालय है। रमन सिंह के कार्यकाल में ही पूरे राज्य को ओडीएफ. घोषित किया जा चुका था। जिसका अर्थ यह है कि राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के शत् प्रतिशत परिवारों के पास शौचालय की सुविधा हो चुकी है। एक अनुमान के अनुसार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की संख्या लगभग 50 लाख है। उनमें से 26.5 प्रतिशत लोगों के पास शौचालय नहीं है। (NHFS-5 के अनुसार) 50 लाख का 26.5 प्रतिशत का अर्थ है कि लगभग 13 लाख परिवारों के पास शौचालय नहीं है। एक शौचालय की लागत 12,500 है। इसका अर्थ यह है कि लगभग 1500 करोड़ के शौचालय सिर्फ कागजों पर बने हैं और पूरी राशि का भाजपाइयों के बीच बन्दरबांट हुआ है क्योंकि NHFS-5 भारत सरकार द्वारा ही कराया जाता है अतः घोटाला स्वप्रमाणित है, इसकी ईडी जांच होनी चाहिये।

 

3. नान घोटाला – नान घोटाले में सीएम सर और सीएम मैडम को समय-समय पर बड़ी राशि रिश्वत की राशि में से प्राप्त होने के अनेक दस्तावेज उपलब्ध हैं। वे दस्तावेज भी रमन सिंह के कार्यकाल में हुई जांच में बरामद हुये हैं। रमन सिंह एवं उसके परिवार की संपत्तियां 2008 से 2018 के बीच 18 गुना बढ़ने की जानकारी स्वयं रमन सिंह एवं अभिषेक सिंह ने दी है। ईडी को फिर से प्रकरण की जांच हेतु ज्ञापन सौंपा जाना चाहिये।

 

4. चिटफण्ड घोटाला – रमन सरकार के कार्यकाल में रमन सिंह, उनके मंत्रियों एवं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के संरक्षण एवं उनकी भागीदारी में राज्य के लाखों गरीब परिवारों की जिंदगी भर की खून-पसीने की कमाई को सैकड़ों करोड़ की राशि चिटफंड कंपनियों ने लूटी थी। रमन सिंह के संरक्षण के कारण ही चिटफंड कंपनियां राज्यवासियों को लूट कर आसानी से राज्य से फरार हो गयीं। इसकी जांच ईडी क्यों नहीं कर रही।

READ MORE  पत्नी के वापस नहीं लौटने से था परेशान;शादी के 8 महीने बाद छोड़ गई थी शराबी पति को | Young man commits suicide after being cut off from train in Janjgir-Champa district, was under stress due to non-return of his wife

 

5. रतनजोत घोटाला – रमन सरकार के कार्यकाल में रतनजोत प्लान्टेशन के नाम पर सैकड़ों करोड़ खर्च किये गये थे तथा नारा दिया गया था कि अब डीजल गाड़ी से नहीं बल्कि बाड़ी से मिलेगा। उन पेड़ों से नाम मात्र का ही डीजल प्राप्त हुआ था। रतनजोत का कोई वृक्ष जीवित नहीं है। बड़ा घोटाला हुआ है। किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

 

6. उज्जवला – NHFS-5 के अनुसार छत्तीसगढ़ के मात्र 19.5 प्रतिशत परिवारों के पास उन्नत कुकिंग गैस सुविधा है। जिसमें बायोगैस के चूल्हे भी शामिल हैं। 19.5 प्रतिशत परिवारों में से अनेक परिवार ऐसे हैं जिनके पास निजी कनेक्शन है तथा उज्जवला के हितग्राही नहीं है। उज्जवला हितग्राही भी सिलेंडर महंगा होने के कारण रिफिल नहीं करा पा रहे। योजना पूरी तरह से असफल है। सिर्फ पैसे की बर्बादी हुई है।

ईडी. कार्यालय, रायपुर के सामने एक दिवसीय धरना देकर कांग्रेस मांग करेगी कि ईडी. उक्त सभी प्रकरणों में जांच करें अथवा ईडी. तथा भाजपाई यह स्वीकार कर लें की ईडी. सिर्फ राजनीतिक आधार पर कांग्रेसियों के विरुद्ध तथा सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य मात्र से ही कार्य कर रही है।

Share this