हम जहां रहते हैं, वहां का भी इतिहास जानना जरूरी: रवि

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साहित्य सृजन परिषद ने आदि कवि वाल्मीकि जयंती और शरद पूर्णिमा पर किया साहित्यिक समारोह

दुर्ग न्यूज़, 31 अक्टूबर। साहित्य सृजन परिषद, भिलाई ने आदि कवि वाल्मीकि जयन्ती और शरद पूर्णिमा के प्रसंग पर दो सत्रों में साहित्यिक समारोह का आयोजन रविवार दोपहर बैकुण्ठधाम (शिव मन्दिर) मड़ोदा जलाशय नेवई,भिलाई के साहित्यिक मंच पर किया। पहले सत्र में लेखक एवं पत्रकार मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन की भिलाई के इतिहास पर लिखित पुस्तक ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ पर परिचर्चा हुई।

शुरुआत में आदि कवि वाल्मिकी और मां सरस्वती के चित्र पर सभी अतिथियों ने पुष्पांजलि अर्पित की और दीप प्रज्ज्वलित किया। इसके उपरांत स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम संयोजक एवं साहित्य सृजन परिषद के अध्यक्ष एनएल मौर्य ‘प्रीतम’ ने आयोजन के उद्देश्य पर रोशनी डाली। लेखक का परिचय परिषद की कोषाध्यक्ष माला सिंह ने दिया। प्रमुख वक्ता के तौर पर उपस्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव ने कहा कि भिलाई पर समग्र रूप में हिंदी में यह पहली पुस्तक है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया जहान को जरूर जानें लेकिन हम जहां रहते हैं उसके आसपास के इतिहास और महत्व को भी जानना चाहिए। उन्होने इस किताब का उल्लेख करते हुए कहा कि भिलाई की स्थापना के शुरुआत का संघर्ष का वह दौर सभी को जानना चाहिए।

उन्होंने लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन को अपना प्रिय छात्र बताते हुए भिलाई विद्यालय सेक्टर-2 के कई प्रमुख छात्रों का विशेष रूप से उल्लेख भी किया। आधार वक्तव्य देते हुए लेखक व मशहूर ब्लॉगर संजीव तिवारी ने कहा कि भिलाई स्टील प्लांट के निर्माण की पृष्ठभूमि पर आधारित किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ ऐतिहासिक घटनाओं, इंजीनियरिंग चमत्कारों और मानवीय भावना के अदम्य संकल्प का सम्मोहक मिश्रण है।यह किताब भारत-सोवियत संघ के सहयोग के मानवीय पहलू पर केंद्रित है।

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अध्यक्षता कर रहे साहित्य-संस्कृतिविद् आचार्य डॉ. महेशचन्द्र शर्मा ने कहा कि लेखक न सिर्फ इतिहास को पढ़ और लिख रहा है बल्कि जी भी रहा है। जिनके कारण भिलाई का नाम हुआ उनके बारे में लिखना भूमि के ऋण से मुक्त होने का लेखक का विनम्र प्रयास है। इस दौरान लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी किताब की रचना प्रक्रिया से उपस्थित लोगों को अवगत कराया तथा आयोजन के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की। इस सत्र का संचालन श्रीमती नीता कम्बोज ‘शीरी’ ने किया। इसके बाद द्वितीय सत्र में आदिकवि वाल्मीकि एवं शरद पूर्णिमा पर केन्द्रित सरस काव्य गोष्ठी में क्षेत्र के लोकप्रिय एवं जाने माने कवियों ने काव्यपाठ किया।

इनमें मुख्य रूप से प्रदीप कुमार पांडे, सुरेश बंछोर, बिसौहा वर्मा, कामेश्वर साहू, दीपक कुमार शारदा, शिवेंद्र केशव दुबे, ओमवीर करण, डॉ रमाशंकर सोनी, नीलम जायसवाल, यशोदा जायसवाल, राम मोहन कश्यप, डॉ. नीलकंठ देवांगन, रियाज खान गौहर, इस्माइल आजाद, चंद्र बर्मन, डॉ नौशाद अहमद सिद्दीकी “सब्र” और छगनलाल सोनी ने अपनी रचनाएं सुनाकर वाहवाही बटोरी।

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