दुनिया का 8वां अजूबा बना कंबोडिया का अंकोरवाट मंदिर, जानिए क्या हैं इसकी खासियतें और इतिहास

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दुर्ग न्यूज़ डेस्क, 28 नवंबर। कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर इटली के पोम्पेई को पछाड़कर दुनिया का आठवां अजूबा बन गया है। 800 वर्ष पुराने इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था। अंकोर वाट मूल रूप से हिंदू धर्म के भगवान विष्णु को समर्पित था, लेकिन बाद में यह बदल कर एक बौद्ध मंदिर बन गया। यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है। यह करीब 500 एकड़ के क्षेत्र में फैला है।

क्या है अंकोरवाट

अंकोरवाट यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट लिस्ट में शामिल दुनिया का सबसे विशाल हिंदू मंदिर है। यह मंदिर मूल रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी दीवारों पर विभिन्न हिंदू ग्रंथों में उल्लेखित विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से चित्रण किया गया है।

क्या है इसका इतिहास

अंकोरवाट मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में किया गया था। मूल रूप से यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन समय के साथ यह हिंदू मंदिर, एक बौद्ध मंदिर में परिवर्तित हो चुका है। मंदिर का हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में परिवर्तित होने का इसकी दीवारों की जटिल नक्काशियों में स्पष्ट दिखाई देता है, जहां हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के साथ-साथ बौद्ध धर्म से जुड़ी कथाओं के दृश्यों को भी दर्शाया गया है।

मंदिर की वास्तुकला

अंकोरवाट मंदिर को अपनी शानदार वास्तुकला की वजह से ही दुनिया का 8वां अजूबा कहा गया है। 500 एकड़ के क्षेत्र में फैला यह मंदिर चारों तरफ से बेहद मजबूत चहारदीवारी से घिरा हुआ है। मंदिर के केंद्रीय परिसर में कमल के आकार के 5 गुंबद बने हुए हैं, जो माउंट मेरु का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर के दीवारों की सज्जा काफी जटिल है, जिसमें खमेर शास्त्रीय शैली का प्रभाव दिखता है।

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