शिक्षक-प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अब बदलाव जरूरी: कुलपति डा सिंह

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भिलाई। ʺराष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षकों के बीएड, डीएलएड जैसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में बदलाव अब जरूरी हो गया है। शिक्षक-प्रशिक्षार्थी तथा शिक्षक-प्रशिक्षक मैदानी स्थितियों के अनुरूप पाठ्यक्रम में परिवर्तन हेतु सुझाव विश्वविधालय को दें।“ उपरोक्त विचार पं. सुन्दर लाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छ.ग. बिलासपुर के कुलपति डॉ. बंश गोपाल सिंह ने क्षेत्रीय केन्द्र दुर्ग अंतर्गत मनसा शिक्षा महाविद्यालय, कुरूद अध्ययन केन्द्र में बीएड प्रशिक्षार्थियों की दस दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किये। उन्होंने कहा, शिक्षक अपने विद्यार्थियों के अंदर के सर्वश्रेष्ठ को बाहर निकाले और उनके अनुरूप उनके व्यक्तित्व का विकास करें।

विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. डीएन शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण-कौशल के संवर्धन पर बल दिया। उन्होने कहा, विद्यार्थियों को ज्ञान की मशीन नहीं बनाना है, बल्कि ज्ञान व सामाजिक संस्कृति का बोध करा कर उन्हें सामाजिक सरोकार वाले इंसान बनाना हैं। अध्ययन केन्द्र के समन्वयक संस्था के प्राचार्य डॉ. स्मिता सक्सेना ने अध्यक्षीय संबोधन में कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर प्रशिक्षार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया और प्रशिक्षण कार्यशाला के अनुभव साझा किये। शिक्षा विभाग की प्रमुख डॉ. नमिता गौराहा ने स्वागत भाषण दिया तथा प्रशिक्षार्थी सुशील कुमार व कविता नेताम ने कार्यक्रम का संचालन किया। डॉ नम्रता भट्ट व डॉ पुष्पा शर्मा व अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

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