कृषि-पशुपालन क्षेत्र में व्यावसायिक संभावनाओं, नवीनतम तकनीक एवं प्रबंधन पर हुए अपडेट

Share this

कामधेनु विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय प्रशिक्षण सह ग्रीष्मकालीन पाठशाला का समापन

दुर्ग। दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलपति डॉ.आरआरबी.सिंह के मार्गदर्शन एवं अधिष्ठाता डॉ.संजय शाक्य के नेतृत्व में आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण सह ग्रीष्मकालीन पाठशाला का समापन वर्चुअल माध्यम से हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम “कृषि, पशुपालन, डेयरी, मात्स्यिकी, रेशम उत्पादन, उद्यानिकी एवं संबद्ध क्षेत्रों में सतत उद्यमिता के अवसर” विषय पर केंद्रित था। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को इन क्षेत्रों में व्यावसायिक संभावनाओं, नवीनतम तकनीकों एवं प्रबंधन के उन्नत दृष्टिकोण से परिचित कराना था, जिससे वे स्वरोजगार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में अधिक सक्षम बन सकें। इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के दौरान देशभर के विशेषज्ञों द्वारा विविध विषयों पर व्याख्यान एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय का यह प्रयास कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्योगों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। समारोह का शुभारंभ डॉ. छतरपाल सिंह, अध्यक्ष, एग्रो एन्वायरमेंटल डेवलेंपमेंट सोसायटी द्वारा स्वागत भाषण से हुआ। सभी विशिष्ट अतिथियों, विशेषज्ञ वक्ताओं और प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम के महत्व और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

निदेशक प्रक्षेत्र डॉ. डी. भोंसले एवं विभागाध्यक्ष द्वारा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया गया। यह प्रशिक्षण प्रतिभागियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ, जिसमें देशभर के विशेषज्ञ वक्ताओं ने आधुनिक पशुपालन तकनीक, डेयरी प्रबंधन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, उद्यानिकी के व्यवसायिक अवसर और सतत उद्यमिता मॉडल जैसे विविध विषयों पर व्याख्यान दिए। प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की विशेष सराहना करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तर, समूह चर्चा और केस-स्टडी आधारित अभ्यास सत्रों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टियों से समृद्ध किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने क्षेत्रों में नवाचार लाने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने हेतु प्रेरित करना था। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, सभी विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर अधिष्ठाता एवं निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ.संजय शाक्य ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञ वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण सह ग्रीष्मकालीन पाठशाला विश्वविद्यालय के विस्तार कार्य एवं सेवा दायित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने व्यावहारिक जीवन में अपना कर अपने व्यवसायिक प्रयासों को अधिक लाभकारी बनाएं। प्रतिभागी इस प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों और दृष्टिकोण का उपयोग करके आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर डॉ. एके सांतरा, डॉ. व्हीएन खूने, दीपक सिंह एवं निलेश कुमार पैंकरा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदना भगत एवं डॉ. रुपल पाठक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

READ MORE  तीन सगे भाइयों की हत्या मामले में 15 आरोपी गिरफ्तार, दुर्ग जिले में DJ पर नाचने को लेकर दो गुटों में हुआ खूनी संघर्ष
Share this