
दुर्ग न्यूज। संभवतः पूरे प्रदेश में पत्रकारों की कॉलोनी सिर्फ इस्पात नगरी भिलाई में है। दुर्ग-भिलाई के मीडिया कर्मियों को नब्बे के दशक में नया राज्य बनने से पहले भूखण्ड का आबंटन किया गया। कालांतर में कुछ पत्रकारों ने यहां आवास का निर्माण किया और निवास करने लगे। बीते सालों में कॉलोनीवासी कई समस्याओं से जूझ रहें हैं। यहां अभी तक सड़क नहीं बनी है, कच्ची सड़क पर गड्ढे हैं। वर्षाकाल में इन गड्ढों में पानी भर जाता है। कालोनी के एक ओर गुमटी वाले हैं। वाहन डेटिंग-पेंटिंग वालों ने मार्ग को गैराज बना रखा है। गुमटी जिस काम के लिए अलॉट हुईं है वह व्यवसाय नही हो रहा। जिसके नाम गुमटी है उसने किराए पर दे रखा है या बेच दिया है। ऐसे तत्वों से बड़ी परेशानी है। कॉलोनी के आवासों में बिजली कनेक्शन सर्कस मैदान वाले ट्रांसफॉर्मर से दिया है। मैदान में मेला लगने या कोई आयोजन होने पर लोड शेडिंग की समस्या होती है। एक बड़ी समस्या सर्कस मैदान पर बेजा कब्जा वालों से है। ये अतिक्रमणकारी बास-बल्ली का धंधा करते हैं। एक कबाड़ का व्यवसायी भी है। इनकी वजह से बड़े ट्रक तथा दूसरी गाडियों का आवागमन होता है। इससे भी कॉलोनी वाले त्रस्त हैं। कई बार शिकायत पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कालोनी के रहवासियों रविशंकर सिंह एवं पारस गुप्ता ने बताया कि बीते सालों में कई जनप्रतिनिधियो तथा निगम में अफसरों के समक्ष समस्याओं को लेकर चर्चा हुई लेकिन किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया।


