
बिलासपुर15 मिनट पहले

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अस्पताल परिसर में नारेबाजी करते रहे डॉक्टर।
बिलासपुर में सिम्स मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने मानदेय की मांग को लेकर शनिवार को हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर ओपीडी व वार्ड में मरीजों का इलाज भी नहीं कर रहे हैं। परिसर पर बैनर पोस्टर पकड़कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई है। इनके इलाज नहीं करने से कई मरीज शनिवार को परेशान होते नजर आए।

सिम्स हास्पिटल के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ.चंचल लहरी ने बताया कि मानदेय बढ़ाने की हमारी मांग पूर्णतया न्यायसंगत है। देश के अलग-अलग राज्यों के सभी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर्स को मिलने वाली मानदेय छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से कहीं ज्यादा हैं। बार- बार इस ओर शासन का ध्यानाकर्षण विभिन्न् पत्रों एवं आंदोलनों से करने के बावजूद तक हमें केवल आश्वासन ही मिला है। डॉ. चंचल लहरी ने आगे बताया कि हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और ये जानते हैं। हमारे ऐसे आंदोलनों से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दूरस्थ क्षेत्रों से काफी संख्या में सिम्स पहुंचने वाले ग्रामीण मरीजों को समय पर सही चिकित्सकीय सेवा न मिल पाने की स्थिति में उनको होने वाली परेशानियों की पीड़ा हम भी महसूस कर सकते हैं। हमारे मांगों के विषय मे गंभीरता पूर्वक विश्लेषण कर यथासंभव यथाशीघ्र फैसला लें। ताकि चिकित्सा जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक बाधित न हो। मगर अब तक हमारी बात को नहीं सुना गया है। जिसके चलते हमने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है।
वहीं डॉक्टरों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के अधिकतर चिकित्सा महाविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित नहीं हैं। कनिष्ठ स्तर पर चिकित्सकों की भारी कमी होने के कारण मरीजों के उपचार का कार्य वरिष्ठ चिकित्सकों की देख रेख में इंटर्न्स द्वारा ही किया जाता है। इस तरह से इंटर्न चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
