
बिलासपुर36 मिनट पहले

- कॉपी लिंक

बिलासपुर में सिम्स मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। इसके कारण सिम्स के एनआईसीयू मैं भर्ती नवजात बच्चों की काउंसलिंग बंद हो गई है। सीनियर डॉक्टर भी नवजात बच्चों की काउंसलिंग नहीं कर रहे हैं। बच्चों का इलाज प्रभावित है। अपनी मांगों को लेकर डॉक्टर्स पिछले 3 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को हड़ताल का तीसरा दिन था

सभी डॉक्टर मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया है। ओपीडी में भी शामिल नहीं हो रहे हैं। इसके चलते मरीजों का इलाज प्रभावित है। सिम्स की पूरी व्यवस्था चौपट हो गई है। पूरा कार्यभार वार्ड ब्वॉय, नर्स व सीनियर डॉक्टरों पर है। दूसरी ओर सिम्स के अधीक्षक डॉ. नीरज शिंदे ने प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टर से बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन वह बेनतीजा रही।
सिम्स हास्पिटल के जूनियर डॉक्टर एशोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. चंचल लहरी ने बताया कि मानदेय बढ़ाने की हमारी मांग पूर्णतया न्यायसंगत है। देश के अलग-अलग राज्यों के सभी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर्स को मिलने वाली मानदेय छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से कहीं ज्यादा हैं। बार-बार इस ओर शासन का ध्यानाकर्षण विभिन्न् पत्रों एवं आंदोलनों से करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला है।
डॉ. चंचल लहरी ने आगे बताया कि हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और ये जानते हैं।। हमारे ऐसे आंदोलनों से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूरस्थ क्षेत्रों से काफी संख्या में सिम्स पहुंचने वाले ग्रामीण मरीजों को समय पर सही चिकित्सकीय सेवा न मिल पाने की स्थिति में उनको होने वाली परेशानियों की पीड़ा हम भी महसूस कर सकते हैं। जिम्मेदारी शासन की भी बनती है। इसलिए हम शासन तक ये संदेश पहुंचाना चाहते हैं। हमारी मांगों के विषय में गंभीरता पूर्वक विश्लेषण कर यथासंभव यथाशीघ्र फैसला लें।
