क्या नगर निगम की तरह कांग्रेस संगठन भी खुद ही चलाना चाहते हैं विधायक वोरा?

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– नरेश सोनी

दुर्ग। प्रदेश के शीर्षस्थ कांग्रेस नेताओं की शुक्रवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संगठन के कार्यों पर नाखुशी जाहिर की। राजधानी के राजीव भवन में हुई इस बैठक में सीएम बघेल ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि संगठन पिछली बैठकों का एजेंडा लागू नहीं कर पाया। दरअसल, यह प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक थी, जिसमें संगठन की खामियों को दूर करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। इसके अलावा राजस्थान में हुए चिंतन शिविर के निर्णयों को लागू करने पर भी चर्चा हुई। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम व स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पार्टीजनों को सक्रियता बढ़ाने की नसीहत दी।

 

राजधानी रायपुर में हुई बैठक के निष्कर्षों को दुर्ग के हालातों से जोड़कर देखें तो यहां संगठन बेहद बीमार नजर आता है। प्रदेश संगठन के निर्देश पर होने वाले कार्यक्रमों में उतने लोग भी नहीं जुट पाते, जितने संगठन में मौजूद है। छात्र संगठन एनएसयूआई से लेकर युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, विभिन्न तरह के प्रकोष्ठों को भी साथ लें तो यह पता चल जाता है कि शहर संगठन पूरी तरह से निर्जीव पड़ा हुआ है। पिछले दिनों संगठन के आयोजित कुछ कार्यक्रमों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि पदाधिकारियो से लेकर कार्यकर्ताओं तक ज्यादातर की रूचि संगठन के कार्यों में नहीं है। जबकि पिछले साल की शुरूआत में शहर कांग्रेस की कार्यकारिणी का गठन किया गया था। छोटे से दुर्ग शहर के लिए बनाई गई कार्यकारिणी में थोक में नियुक्तियां की गई। मजे की बात है कि हाल ही में अग्निपथ योजना का विरोध करने के लिए जब सत्याग्रह किया गया तो इस कार्यक्रम में कुल जमा उतने लोग भी नहीं जुट पाए, जितने दुर्ग शहर कांग्रेस के पदाधिकारी हैं। जिन आयोजनों में पार्टी के ही लोग न जुट पाएं, उनसे आम लोगों के जुडऩे की अपेक्षा करना बेमानी है।

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सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुर्ग शहर में कांग्रेस के नेतृत्वकर्ता कहीं न कहीं बड़ी चूक कर रहे हैं। जब नेतृत्वकर्ता अपने साथ कार्यकर्ताओं को ही नहीं जोड़ पा रहे हैं तो उनसे जनता कैसे जुड़ेगी? गौरतलब है कि अगले साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। दुर्ग में वर्तमान में कांग्रेस का ही विधायक है, लेकिन पार्टी के लोगों का कहना है कि इस बार उनके जीत की संभावना बेहद कम है।

संगठन को भी नहीं है काम करने की आजादी?

पार्टी के जानकारों का कहना है कि जिस तरह से नगर निगम में महापौर से लेकर एमआईसी सदस्यों और पार्षदों तक को अपने हिसाब से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की अनुमति नहीं है, ठीक उसी तरह दुर्ग शहर संगठन में भी किसी को अपने हिसाब से संगठन को आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं है। पिछले दिनों जब राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय ने दुर्ग नगर निगम का घेराव करने की चेतावनी दी थी, तब पहली बार विधायक अरूण वोरा ने महापौर के जरिए बयान जारी करवाया था। इसके बाद एमआईसी सदस्यों के बयान भी जारी करवाए गए। यह पहला अवसर था, जब किसी मसले पर महापौर और एमआईसी सदस्यों के बयान सामने आए। इससे पहले तमाम तरह की बयानबाजी विधायक स्वयं ही किया करते थे। इस घटनाक्रम को कई लोगों ने भाई-बहन के पुराने रिश्ते से भी जोड़कर देखा।

इधर, कांग्रेस संगठन से जुड़े एक जिम्मेदार पदाधिकारी का कहना था कि वे संगठन में स्वयं को असहज पा रहे हैं और इसीलिए वे किसी तरह की गतिविधियों में भी भागीदारी नहीं करते। शहर संगठन में कुल ४ प्रवक्ता बनाए गए, लेकिन इन चारों में से कोई भी सक्रिय नहीं है। नासिर खोखर, देवेश मिश्रा, संदीप श्रीवास्तव व सुशील भारद्वाज वर्तमान में पार्टी के प्रवक्ता हैं। किसी भी पार्टी में प्रवक्ता का काम पार्टी और संगठन की रीति-नीति और कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार करना है, लेकिन चार में से एक भी प्रवक्ता को कभी पार्टी का प्रचार करते नहीं पाया गया। एकाध प्रवक्ता की कभी कोई विज्ञप्ति जरूर जारी हुई, लेकिन सक्रिय रूप से कोई भी काम नहीं कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नगर निगम की तर्ज पर शहर संगठन के लोगों को भी पार्टी या संगठन के प्रचार की अनुमति नहीं है? सवाल इसलिए भी क्योंकि जिस तरह कभी महापौर का मीडिया में बयान नहीं आया, उसी तरह शहर कांग्रेस अध्यक्ष गया पटेल का भी कोई बयान नहीं आया। जबकि प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर इस दौरान दर्जनों ऐसे अवसर आए, जब संगठन के नेतृत्वकर्ता के रूप में शहर अध्यक्ष बयान जारी कर सकते थे।

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