ये नगर निगम की भ्रष्ट व्यवस्था है जनाब! खेल तो दिखाएगी ही…

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दुर्ग। नगर निगम में पदभार संभालते ही नया अफसर सबसे पहले ‘गुंजाइश’ वाले विभागों और उनके कामों का निरीक्षण करने निकलता है। इसके बाद मातहत अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ गुंजाइश पर सामंजस्य बैठाने की कोशिश होती है। यदि सामंजस्य बैठ गया तो मातहत लोग अपने पदों पर काम करते रहते हैं, यदि नहीं बैठा तो उन्हें लूप लाइन में डालकर अपने हिसाब से अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रभार सौंपा जाता है, ताकि गुंजाइश में कहीं कोई कमी न हो पाए। दुर्ग नगर निगम में ऐसा कई दशकों से चल रहा है। हालात यह है कि विशेषज्ञ होने के बाद भी कई विभाग प्रभारियों और बाबुओं के हवाले हैं। कई विभागों में अयोग्य लोग बैठे हैं, क्योंकि गुंजाइश बरकरार है।

३ साल पहले चपरासी के पद पर भर्ती हुआ भूपेन्द्र गोइर, जिसे नगर निगम में सभी लोग शुभम के नाम से जानते हैं, काफी समय से आयुक्त का निज सहायक बना बैठा है। शुभम की नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में हुई थी। हालांकि बाद में उन्हें लिपिक के पद पर पदोन्नति मिल गई। जो व्यक्ति एक समय अधिकारियों-कर्मचारियों को चाय-पानी पिलाने का काम करता था, आज वह एयरकंडीशंड कक्ष में आयुक्त जैसे सबसे जिम्मेदार अफसर के नीचे काम कर रहा है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि चपरासी स्तर का कोई भी व्यक्ति ऐसे पदों पर यूं ही नहीं पहुंच जाता। इसी शुभम को लेकर कई तरह की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही है, लेकिन अफसरों के कानों में जूं नहीं रेंगी। आज भी कई तरह के सेटिंग वाले काम यही शुभम कर रहा है।

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कमोबेश ऐसा ही हाल कर्मशाला का भी है। यहां एक नए नवेले लड़के शोएब अहमद को प्रभारी बनाकर बिठा दिया गया है। शोएब को कर्मशाला का प्रभारी बनाए जाने के बाद अचानक ही नगर निगम के वाहन ज्यादा डीजल पीने लगे, गाडिय़ों का मेन्टनेंस खर्च भी बढ़ गया। कई खड़े वाहनों में डीजल की खपत दर्शाकर लाखों रूपयों का वारा-न्यारा किया गया। शोएब की शिकायत भी हुई, लेकिन नगर निगम की भ्रष्ट व्यवस्था ने कोई कार्यवाही करना मुनासिब नहीं समझा। गौरतलब है कि शोएब, उस शुभम गोयर का करीबी मित्र है, जो निगम आयुक्त के निज सहायक हैं। मीडिया में जब शोएब के कारनामों की खबर आई तो उसे इस बात का भरोसा था कि उसका करीबी मित्र सब कुछ संभाल लेगा।

सहायक राजस्व निरीक्षक हेमलता वर्मा इन दिनों स्थापना शाखा में बड़ा बाबू बनकर बैठी हैं। वहीं राजेन्द्र साहू (ग्रेड-२), जो कि बाबू थे, उन्हें रिकार्ड रूप में भेज दिया गया। सहायक राजस्व निरीक्षक साक्षी चौहान को स्थापना शाखा में भविष्य निधि का काम देकर रखा गया है। इनके अलावा योगेन्द्र वर्मा, जो कि चतुर्थ श्रेणी से २ साल पहले पदोन्नत होकर सहायक राजस्व निरीक्षक बने, उनसे ऑफिस का काम लिया जा रहा है, जबकि वे जिस पद पर हैं, वह फील्ड का है।

लेखाधिकारी के रहते बाबू से ले रहे काम

मजे की बात है कि नगर निगम में विशेषज्ञ लेखाधिकारी मौजूद है, उसके बावजूद उन्हें दरकिनार कर एक बाबू से लेखाधिकारी का काम लिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रमाकांड शर्मा नगर निगम के लेखाधिकारी पद पर पदस्थ हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों की मनमानी कहें या फिर गुंजाइश की आस, कि उनकी जगह राजकमल बोरकर से बतौर लेखाधिकारी काम लिया जा रहा है, जबकि बोरकर बाबू के पद पर हैं। रमाकांत शर्मा काफी वक्त से खाली बैठे हैं। निगम के जानकारों का कहना है कि अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों के रहते हुए भी नए व अनुभवहीन लोगों से काम इसलिए लिया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा सके और कुर्सियों पर बैठे लोगों से मनमाना काम लिया जा सके।

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मनमानी और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया निगम

नया अफसर आता है तो नया टारगेट भी सेट होता है। …और इस नए टारगेट से आम आदमी ही प्रभावित होता है। नगर निगम का काम आम लोगों को जन सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन आज पूरा शहर सिर से लेकर पैर तक समस्याओं में डूबा पड़ा है। शहर की सुध लेने वाला कोई नहीं है। पिछली परिषद तक नगर निगम सामान्य चलता रहा, क्योंकि निगम पर किसी नेता की मंशा को नहीं थोपा जाता था। नई परिषद आने के बाद जिस तरह से नेताओं की मंशा हावी हुई है, उसने पूरे शहर का कबाड़ा करके रख दिया है। नेताओं की मंशा के चलते महापौर जैसा प्रभावशाली पद भी गौंण होकर रह गया है।

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