कांग्रेस सुप्रीमो के बयान बने वोरा परिवार के लिए गले की फांस!

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राहुल के बाद सोनिया ने भी मोतीलाल वोरा को लपेटा, कहा- एजेएल और यंग इंडियन का लेनदेन वोरा ने ही निपटाया

नरेश सोनी

दुर्ग। नेशनल हेराल्ड केस में एक बार फिर दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा का नाम उछला है। इस बार यह कार्य कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने किया है। श्रीमती गांधी ने ईडी से हुई पूछताछ में स्पष्ट कहा है कि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन के बीच हुए लेन-देन को मोतीलाल वोरा ने ही निपटाया। सोनिया से पहले उनके पुत्र राहुल गांधी ने भी ईडी की पूछताछ में स्व. मोतीलाल वोरा का नाम लिया था। इधर, ईडी के समक्ष यह खुलासा भी हुआ है कि मोतीलाल वोरा भी नैशनल हेराल्ड के शेयर धारक थे। हालांकि राष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, स्व. वोरा के पुत्र अरूण वोरा ने इससे साफतौर पर इनकार किया है। अरूण वोरा पहले ही राहुल गांधी के बयान का कड़े शब्दों में विरोध कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस के ही नेता मल्लिकार्जुन खडग़े व पवन बंसल ने भी मोतीलाल वोरा का नाम लिया था। ऐसे में यह स्पष्ट होना ही चाहिए कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गलतबयानी कर रहा है या फिर वोरा परिवार।

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने भी राहुल गांधी की ही तरह स्पष्ट कहा कि एजेएल और यंग इंडियन के बीच सभी वित्तीय लेनदेन की जिम्मेदारी मोतीलाल वोरा पर ही थी। यंग इंडियन के पास ही नैशनल हेराल्ड का मालिकाना हक है। जबकि सोनिया व राहुल गांधी इस कंपनी के प्रमोटर है। वहीं मोतीलाल वोरा भी इसमें शेयरधारक थे। नैशनल हेराल्ड न्यूजपेपर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के दूसरे दिन ईडी के कुछ सवालों के जवाब में सोनिया गांधी ने ‘नहीं मालूम में उत्तर दिया। ईडी के सूत्र बताते हैं कि सोनिया ने पूछताछ में मोतीलाल वोरा का नाम लिया। एजेएल और यंग इंडियन के बीच हुए सौदे को लेकर ये सवाल थे। इस सौदे के तहत एजेएल की 800 करोड़ रुपये की संपत्तियों को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर किया गया था। इस कंपनी में सोनिया और राहुल प्रमोटर हैं। इनकी कंपनी में 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है।

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कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछताछ के दौरान बताया कि सौदे के वक्त मोतीलाल वोरा ट्रेजरर थे। कांग्रेस, एजेएल और यंग इंडियन के बीच ट्रांजैक्शन के ब्योरे के बारे में सिर्फ उन्हें ही पता है। इसके पहले राहुल गांधी भी ईडी से पूछताछ में मोतीलाल वोरा का नाम ले चुके हैं। यही स्टैंड कांग्रेस के अन्य नेताओं का भी रहा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और ट्रेजरर पवन कुमार बंसल से भी जब एजेंसी ने पूछताछ की थी तब उन्होंने यही बात कही थी। एजेएल वही कंपनी है जिसके पास नैशनल हेराल्ड (अंग्रेजी), नवजीवन (हिंदी) और कौमी आवाज (उर्दू) के प्रकाशन का अधिकार था। इसकी नींव देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। इस कंपनी को देश के कई राज्यों में सरकार की ओर से जमीन आवंटित की गई थीं।

क्यों उछाला जा रहा है वोरा का नाम?

कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा अब दुनिया में नहीं हैं। वह गांधी परिवार के बेहद करीबी थे। वोरा, इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक के साथ काम कर चुके हैं। वह तकरीबन 18 साल कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रहे। मोतीलाल वोरा को 22 मार्च 2002 को एजेएल का प्रेसीडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) बनाया गया था। कर्ज से दबी एजेएल 2008 में बंद हो गई थी। तब उस पर 90 करोड़ से ज्यादा का कर्ज था। आरोप है कि यंग इंडियन प्राइवेट ने इस कंपनी के एसेट्स को खरीद लिया था। इस पूरी खरीद-फरोख्त में नियमों को ताक पर रखा गया। इस लेनदेन के जरिये यंग इंडियन को एजेएल की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी ट्रांसफर हुईं। तब वोरा कांग्रेस के ट्रेजरर हुआ करते थे। उन्होंने उस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर भी किया था जिसमें एजेएल ग्रुप के नैशनल हेराल्ड न्यूजपेपर को जनवरी 2008 में बंद करने की बात कही गई थी। वोरा एजेएल के शेयरधारकों में शामिल थे। मामले में वोरा पर भी आरोप हैं। यह और बात है कि 2020 में कोरोना की वजह से निधन के बाद ईडी ने उनके खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी थी।

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कांग्रेस नेताओं को अटक रहे हैं कौन से सवाल?

नैशनल हेराल्ड को 90 करोड़ रुपये कर्ज देने और उसके सभी शेयर यंग इंडियन को ट्रांसफर किए जाने से जुड़े सवाल कांग्रेस के आला नेताओं को अटक रहे हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें नहीं पता कि ट्रांजैक्शन कैसे हुआ। इसके उलट आरोप यह है कि नैशनल हेराल्ड को 90 करोड़ रुपये का लोन एक साजिश के तहत दिया गया था। इसका मकसद यंग इंडियन को सभी संपत्तियों को ट्रांसफर करना था। यंग इंडियन में 76 फीसदी हिस्सेदारी राहुल गांधी और सोनिया गांधी की है। मोतीलाल वोरा इसमें शेयरधारक थे।

वोरा परिवार के लिए बना गले की फांस

इधर, कांग्रेस के दो शीर्ष नेताओं द्वारा मोतीलाल वोरा का नाम लिए जाने के बाद वोरा परिवार के लिए यह मामला गले की फांस बन गया है। ईडी से कुछ समय पहले हुई पूछताछ में जब राहुल गांधी ने वोरा का नाम लिया था, तब उनके पुत्र दुर्ग विधायक अरूण वोरा ने इसका कड़े शब्दों में प्रतिकार किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि राहुल गांधी इस तरह की बातें कैसे कर सकते हैं? उन्होंने इस मामले में हुई गड़बडिय़ों से भी पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन अब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा भी वोरा का नाम लिए जाने के बाद वोरा परिवार में सन्नाटा पसरा हुआ है। अरूण वोरा दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक और दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री हैं। वे इस मामले को न निगल पा रहे हैं, न उगल पा रहे हैं। गौरतलब यह भी है कि दुर्ग क्षेत्र में वोरा परिवार की राजनीति ५ दशकों से भी ज्यादा वक्त से बदस्तूर चल रही है।

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(न्यूज चैनल्स व राष्ट्रीय मीडिया से इनपुट के आधार पर)

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