पारंपरिक नृत्य के साथ प्रारंभ हुए भोरमदेव महोत्सव में उमड़े भक्त, कल भी जबरदस्त आयोजन

Share this

 

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-2.jpeg

कवर्धा,19 मार्च। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में प्रत्येक वर्ष होने वाला भोरमदेव महोत्सव आज से प्रारंभ हो रहा है। इस वर्ष 2023 में 27वां भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस बार महोत्सव आज एवं कल होगा। प्राचीनतम काल से प्रत्येक वर्ष भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होली के तेरस और चौदस तिथि होते आ रहा है। 19 मार्च को बाबा भोरमदेव मंदिर में शिव जी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर प्रांगण में 12 से 12.30 बजे के बीच जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की पांरम्परिक नृत्य के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के स्थानीय तथा अंचल के कलाकारों को भी महत्व देते हुए मंच प्रदान किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू होगा। दिन में दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मंदिर प्रांगण में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। दो दिनों तक मंदिर प्रांगण में जसगीत, बैगा नृत्य, शिव-पार्वती कथा एवं भजन, राम भजन, पंडवानी, पंथी नृत्य, सहित अलग-अलग धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
कलेक्टर जनमेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उम्मेद सिंह ने एक दिन पहले महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए महोत्सव स्थल, मंदिर प्रांगण, प्राचीन सरोवर, पार्किंग स्थल, मंदिर के सामने उद्यान का अवलोकन किया। व्यापारियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसके लिए व्यवस्थित तरीके से दूकानों का भी आंबटन किया गया है।
छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरात्तविक, धार्मिक, पर्यटन और जन आस्था का केन्द्र के नाम से भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होता है। इस बार इस दो दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ और भारतीय संस्कृति की अलग-अलग कला विधाओं का मंच में संगम होने जा रहा है। दो दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति के साथ बॉलीवुड कार्यक्रमों का आंनद उठा सकते है।

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-1.jpeg

तेरस और चौदस की तिथि का बाबा भोरमदेव के लिए विशेष महत्व
भोरमदेव मंदिर के प्रधान पुजारी अशीष शास्त्री ने बताया कि भोरमेदव मंदिर में प्रत्येक वर्ष होती के बाद तेरस और चौदस को बाबा भोरमदेव शिव जी के लिए विशेष दिन रहता है। प्राचीन काल से इन तिथियों के दिन मंदिर में विशेष अनुष्ठान और दिव्य श्रृंगार सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते है। यहां प्राचीन काल से मंदिर के समीप स्थानीय मेला का आयोजन भी होते आया है, जो समय के साथ-साथ स्थानीय मेला अब महोत्सव का स्वरूप ले लिया है। इन दो दिनो में मंदिर में बाबा भोरमदेव शिव जी का विशेष विशेष अनुष्ठान और दिव्य श्रृंगार सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते है। प्रात काल बाबा भोरमदेव का महाअभिषेक, एक हजार नामों से सहर्षाचन,रूद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार आरती होती है। दूसरे पहर शायम काल में सहत्रधारा से महाभिषेक,श्रृंगार महाआरती-भस्म आरती, शिव सरोवर के सामने भगवान वरूण देव का पूजन, दीपदान गंगाआरती की जाती है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

READ MORE  MLA रंजना बोलीं- प्रदेश महिलाओं को भी दिलवाएं 50 हजार, कर्नाटक में कांग्रेस ने कियागृहणियों से वादा | Demand of Chhattisgarh BJP MLA Ranjana Sahu from Priyanka Gandhi get women money
Share this