

कवर्धा,19 मार्च। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में प्रत्येक वर्ष होने वाला भोरमदेव महोत्सव आज से प्रारंभ हो रहा है। इस वर्ष 2023 में 27वां भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस बार महोत्सव आज एवं कल होगा। प्राचीनतम काल से प्रत्येक वर्ष भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होली के तेरस और चौदस तिथि होते आ रहा है। 19 मार्च को बाबा भोरमदेव मंदिर में शिव जी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ मंदिर प्रांगण में 12 से 12.30 बजे के बीच जिले में निवासरत विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की पांरम्परिक नृत्य के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। महोत्सव में छत्तीसगढ़ के स्थानीय तथा अंचल के कलाकारों को भी महत्व देते हुए मंच प्रदान किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू होगा। दिन में दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मंदिर प्रांगण में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। दो दिनों तक मंदिर प्रांगण में जसगीत, बैगा नृत्य, शिव-पार्वती कथा एवं भजन, राम भजन, पंडवानी, पंथी नृत्य, सहित अलग-अलग धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
कलेक्टर जनमेजय महोबे एवं पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उम्मेद सिंह ने एक दिन पहले महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए महोत्सव स्थल, मंदिर प्रांगण, प्राचीन सरोवर, पार्किंग स्थल, मंदिर के सामने उद्यान का अवलोकन किया। व्यापारियों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो इसके लिए व्यवस्थित तरीके से दूकानों का भी आंबटन किया गया है।
छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, पुरात्तविक, धार्मिक, पर्यटन और जन आस्था का केन्द्र के नाम से भोरमदेव महोत्सव का आयोजन होता है। इस बार इस दो दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ और भारतीय संस्कृति की अलग-अलग कला विधाओं का मंच में संगम होने जा रहा है। दो दिवसीय महोत्सव में छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति के साथ बॉलीवुड कार्यक्रमों का आंनद उठा सकते है।
तेरस और चौदस की तिथि का बाबा भोरमदेव के लिए विशेष महत्व
भोरमदेव मंदिर के प्रधान पुजारी अशीष शास्त्री ने बताया कि भोरमेदव मंदिर में प्रत्येक वर्ष होती के बाद तेरस और चौदस को बाबा भोरमदेव शिव जी के लिए विशेष दिन रहता है। प्राचीन काल से इन तिथियों के दिन मंदिर में विशेष अनुष्ठान और दिव्य श्रृंगार सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते है। यहां प्राचीन काल से मंदिर के समीप स्थानीय मेला का आयोजन भी होते आया है, जो समय के साथ-साथ स्थानीय मेला अब महोत्सव का स्वरूप ले लिया है। इन दो दिनो में मंदिर में बाबा भोरमदेव शिव जी का विशेष विशेष अनुष्ठान और दिव्य श्रृंगार सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठान होते है। प्रात काल बाबा भोरमदेव का महाअभिषेक, एक हजार नामों से सहर्षाचन,रूद्राभिषेक, विशेष श्रृंगार आरती होती है। दूसरे पहर शायम काल में सहत्रधारा से महाभिषेक,श्रृंगार महाआरती-भस्म आरती, शिव सरोवर के सामने भगवान वरूण देव का पूजन, दीपदान गंगाआरती की जाती है। इस उत्सव में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन होता है।

