
कवर्धा5 मिनट पहले

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद।
ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की एक किताब फाड़ दी। कवर्धा में एक कार्यक्रम के दौरान किसी ने उन्हें किताब का वह पन्ना दिखाया था। जिसमें लिखा था कि बनावटी साधुओं के विषय में चर्चा करें। ये देखकर ही अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और उन्होंने उस पन्ने को फाड़कर अलग कर दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने 2 दिन के प्रवास पर कवर्धा पहुंचे हुए हैं। वहां वो शुक्रवार को प्रवचन कर रहे थे। तभी किसी ने उन्हें यह किताब दिखाई थी। किताब में लिखा था बनावटी साधुओं और ठगों के संबंध में कक्षा में चर्चा करें। छात्रों को बताएं कि समाचार पत्र में ऐसे लोगों के द्वारा ठगी करने की घटनाएं आमतौर पर प्रकाशित की जाती हैं। ऐसे समाचारों को जमा करवाएं। तीन-चार छात्रों को अलग-अलग पात्र बनाकर उनसे कक्षा में अभिनय करवाते हुए पाठ पढ़ाएं।
लिखित विरोध करिए
बताया जा रहा है कि यह देखने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए। उन्होंने मंच से ही कहा कि आप लोगों से अनुरोध है। यदि आप लोगों के बच्चों को यह पढ़ाया जा रहा है तो इसका लिखित विरोध करिए। कहिए कि हम इस किताब को बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे।
अंग्रेजी पढ़कर ईसाई हो जाएगा बच्चा
उन्होंने कहा कि हम गुरुकुल में बच्चों को भेज देंगे। मगर ऐसी पढ़ाई बच्चों को नहीं कराएंगे। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कम से कम आप लोगों को तैयार होना होगा। यदि आप तैयार नहीं होंगे। सोचेंगे अंग्रेजी पढ़कर आपका बच्चा कलेक्टर हो जाएगा तो ये जान लीजिए कि अंग्रेजी पढ़कर आपका बच्चा कलेक्टर हो जाएगा तो वह ईसाई भी हो जाएगा।

अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका लिखित विरोध करने की मांग की है।
गुरुकुल में पढ़े लोग विद्वान हुए
अविमुक्तेश्वरानंद ने आगे कहा कि राजनीति बंद करिए। यदि आप कॉन्वेंट स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाना चाहते हैं तो इसका मतलब है कि आप ईसाई बनना चाहते हैं। ये भारत देश है। यहां गुरुकुल चलते थे और गुरुकुल में पढ़े हुए लोग ही विद्वान हुए हैं। भागवत गीता लिखने वाले कितनी अंग्रेजी जानते थे। वो किस कॉन्वेंट में पढ़े थे, वो किस किंडर गार्डन में गए थे। वो अंग्रेजी नहीं जानते थे। ज्ञान के मामले में सारा संसार आज व्यास जी के झूठे को खाता है। इसी तरह से गौतम हैं, परासर है। ना जाने कितने विद्वान हैं।
शंकराचार्य किस कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े थे। नहीं पढ़कर भी पूरे देश को नेतृत्व दिया की नहीं। मगर आप लोगों के मन में ये धारण बन गई है कि मेरा बेटा अंग्रेजी स्कूल में नहीं पढ़ेगा तो…यदि ये बात आपके मन में ना हो तो..। यदि परिस्थिति में आप लोगों को ऐसे किताबों को इनकार करना होगा।
इस किताब को लेकर बवाल
दरअसल विवादों में आने वाली यह पुस्तक छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की हिंदी छत्तीसगढ़ी और संस्कृत के नाम से हे। ये किताब कक्षा पांचवी के बच्चों के लिए है। इस पुस्तक के अध्याय चमत्कार’ नाम से है। जो पेज नंबर 130 पर प्रकाशित है। इस अध्याय को जाकिर अली ने लिखा है।

इसी पन्ने को लेकर शंकराचार्य ने आपत्ति जताई है।
बीजेपी बोली-धर्म की आस्था का अपमान
उधर, इस पूरे मामले के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। इस मामले को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा है कि कांग्रेस हमेशा से धर्म की आस्था का अपमान करते आई है। इस पुस्तक में जो आपत्तिजनक बात कही गई है उसकी जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस एक एजेंडे के तहत इस तरह से लोगों के आस्था को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। जब तक सरकार इस पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं करती तब तक भारतीय जनता पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
BJP शासनकाल में छपी है पुस्तक
वहीं कांग्रेस के नेता और छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि पुस्तक का यह पाठ्यक्रम अभी वर्तमान का नहीं है, बल्कि यह 2010-11 के समय का है। उस समय प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी। CM रमन सिंह और शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल थे। इस पुस्तक और इसके पाठ्यक्रम को अनुमोदित करने वाली कमेटी 2005 की है। जिसके अध्यक्ष तत्कालीन कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता यूनिवर्सिटी के कुलपति सच्चिदानंद जोशी थे। ये BJP के शासनकाल के समय की पुस्तक है।
शंकराचार्य से जुड़ी कुछ और खबरें पढ़िए
तीर्थ स्थलों को पर्यटन स्थल बनने से रोकें’ शंकराचार्य से भास्कर की खास बातचीत पढ़िए

देवभूमि की दरकती जमीन पर आस्था का केंद्र जोशीमठ हिल चुका है। घरों की दीवारों पर दरारें हैं। जमीनें फट चुकी हैं। लोगों को उनके घरों से निकाला जा रहा है। ऐसे में ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दैनिक भास्कर से खुलकर अपने विचार रखे। इस आपदा का क्या प्रभाव पड़ेगा? धार्मिक दृष्टिकोण क्या है? कैसे बच सकेंगे, जानिए, उन्हीं के शब्दों में:-
आज देवभूमि में जो हालात बने हैं, शायद न होते, अगर हमने तीर्थ को तीर्थ समझा होता। जैन समाज देश में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन जिस ताकत से वह अपने तीर्थ सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनने से रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
घरों में दरारें बढ़ती जा रही है…
हिन्दू समाज के सभी लोगों को समझना चाहिए कि तीर्थ अलग है, पर्यटन अलग है। जोशीमठ समेत पूरी देवभूमि को पर्यटन स्थल बनाने का एक दुष्परिणाम भी आज के हालात हैं। लोग न घरों में रह पा रहे और न ही जमीन पर। घरों में दरारें बढ़ती जा रही है, जमीन लगातार फट रही है। प्रकृति और कैसे प्रतिक्रिया दे?इस लिंक पर क्लिक कर पूरा इंटरव्यू पढ़ें।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बेबाक बोल…

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के नवनियुक्त शंकराचार्य हैं। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से नजदीकी पर दो टूक जवाब दिया। कहा- हम अपने मां-बाप के नहीं हुए। कांग्रेस-भाजपा के क्या होंगे। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा पर भी बात की।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य बनने के बाद पहली बार राजधानी भोपाल के झरनेश्वर मंदिर के प्रवास पर हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कांग्रेस के ज्यादा नजदीक थे, ये कहना जितना भम्रपूर्ण है, उतना ही ये भी कि हम किसी पार्टी के नजदीक होते जा रहे हैं। हम केवल सनातन धर्म के हैं,और सनानत धर्म के ही रहेंगे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर उन्होंने कहा कि यात्रा अच्छी है। उन्हें लग रहा होगा कि भारत टूट रहा है।पढ़ें पूरी खबर
