अगरी कला के मिडिल स्कूल में आंखों पर पट्‌टी बांधकर पढ़ाई कर रहे बच्चे, किताब में शब्दों को छूकर बता देते हैं लिखा हुआ | Children studying blindfolded in Agri Kala Middle School tell by touching the words written in the book

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कवर्धा9 घंटे पहले

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कबीरधाम जिले का एक स्कूल ऐसा भी हैं, जहां बच्चे बिना देखे किताबों में शब्दों को छूकर उस पर लिखा हुआ बता देते हैं। ध्यान के जरिए बच्चों में यह कला विकसित हुई है। इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। दरअसल, मामला ग्राम अगरी कला स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल का है।

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यहां अध्ययनरत 6-7 बच्चे में यह विलक्षण प्रतिभा देखने को मिल रही है। शिक्षिका विधि तिवारी ने ध्यान से जुड़ी मिड ब्रेन एक्टिवेशन की ट्रेनिंग देती हैं। इसके नतीजे भी देखने को मिल रहा है। मिड ब्रेन एक्टिवेशन के लगातार अभ्यास से बच्चे बंद आंखों से किताबों को छूकर उसमें लिखा हुआ पढ़ लेती है। यही नहीं, रंगों की पहचान करने की क्षमता भी विकसित होती दिख रही है। शिक्षिका विधि तिवारी ने बताया कि उन्होंने यू-ट्यूब व ध्यान से जुड़ी किताबों के जरिए पहले खुद इसे सीखा। उसके बाद इसे बच्चों को अभ्यास कराने के लिए बाकायदा अनुमति भी ली है। इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहा है।

शनिवार को बैगलेस- डे पर नवाचार की शुरुआत
सरकारी स्कूलों में शनिवार को बैगलेस- डे घोषित किया है। इस दिन स्कूल में बच्चों को खेल- खेल में पढ़ाई व उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित करने के लिए शिक्षिका विधि तिवारी ने यह नवाचार शुरू किया। करीब 3 महीने से वह बच्चों को अभ्यास करा रही है, जिससे 14- 15 बच्चों में ध्यान की क्षमता का विकास हुआ है। इस नई पहल से इनके पालक भी हर्षित हैं। इनका कहना है कि यह फायदेमंद है।

विधि ने कहा- अभ्यास से इंद्रियां तेजी से काम करती हैं
शिक्षिका विधि तिवारी बताती हैं कि ध्यान के इस लगातार अभ्यास से इंद्रियां और दिमाग तेज करने का काम करती है। इससे बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ जाती है, जो उनकी पढ़ाई में मदद करती है। पांच से 15 साल उम्र तक के बच्चों का मस्तिष्क इस अभ्यास से सरलता से सक्रिय हो सकता है। इससे उनके नॉलेज में वद्धि होने के साथ ही सीखने की इच्छाशक्ति बढ़ती जाती है। उनका ज्ञान भी बढ़ता है।

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