
बिलासपुरएक घंटा पहले

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दीवारों में चौड़ी दरारें, छत से गिरता प्लास्टर और खस्ताहाल भवन, ये हालत है बिलासपुर के सफेद खदान स्थित प्राथमिक पाठशाला की। भवन को देखकर ही लगता है कि इसके भीतर पढ़ाई कराना खतरे से खाली नहीं है और भवन अब ढहाने लायक है। यही वजह है कि शिक्षकों ने स्कूल में ताला जड़ दिया है और बच्चों की कक्षाएं बरगद के पेड़ के नीचे बिठाकर ली जा रही है।

मैदान चारों ओर से खुला होने के कारण लोग इसे आम रास्ते की तरह इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा मवेशियों का जमावड़ा भी रहता है। इससे पढ़ाई करने वाले छात्र और पढ़ाने वाले शिक्षकों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मस्तूरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सफेद खदान वार्ड क्रमांक 43 नगर निगम सीमा में आता है।
4 साल में 8 बार भेज चुके हैं जानकारी
स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि पुराना भवन जर्जर होने के कारण दो अतिरिक्त कक्ष में कक्षाएं लग रही हैं। एक भवन कक्षा पहली से तीसरी और एक में कक्षा चौथी से पांचवी के बच्चों को बिठाया जाता था लेकिन इस साल दोनों भवन के छत के चारों ओर बारिश में सीपेज आने के कारण क्लास रूम में पानी भर जा रहा था।
सफेद खदान में लाल पानी
स्कूल के हेंड पंप से लाल पानी निकलता है। छात्रों को पीने का पानी अपने घर से लाना पड़ता है। एक टेपनल लगाया गया है, जिसमें कभी पानी आता है, कभी नहीं आता है मध्याह्न भाेजन बनाने वालों को आसपास से पानी मांगकर खाना पकाना पड़ता है।
लगातार घट रही संख्या
स्कूल में भारी अव्यवस्था होने के कारण छात्रों की संख्या हर साल कम होने लगी है। चार साल पहले 250 से अधिक छात्रों की उपस्थिति रहती थी। घटकर दर्ज संख्या 102 रह गई है। वहीं उपस्थिति 70 बच्चों से अधिक नहीं रहती है, जबकि यहां 5 कक्षाओं के लिए पांच टीचर नियुक्त किए गए हैं।
शौच के लिए घर भेजते हैं
स्कूल में दो शौचालय का निर्माण किया गया है दोनों की हालत जर्जर होने के कारण इसमें भी ताला लगा दिया गया है। हैंडपंप एक साल से खराब है। बच्चों को टॉयलेट करना होता है तो उन्हें घर भेज दिया जाता है।
