


रायपुर। बलौदाबाजार हिंसा मामले में जेल में बंद कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। सात महीनों से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद देवेंद्र यादव अदालती कागज के आने पर शुक्रवार को रिहा किए जाएंगे।
बता दें कि 15 और 16 मई 2024 की दरमियानी रात कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के धार्मिक स्थल के पूज्य जैतखाम में तोड़फोड़ की गई थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट समाज के लोग मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे। जिसके बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने न्यायिक जांच की घोषणा की।

इस बीच 10 जून को जैतखाम में तोड़-फोड़ के विरोध में हजारों लोग कलेक्टोरेट के पास एकत्र हुए। जमकर हंगामा के बाद प्रदर्शन हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने तांडव मचाते हुए कलेक्टर और एसपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया। आगजनी की इस घटना में सरकारी संपत्तियों को 12.53 करोड़ रुपए का भारी नुकसान पहुंचा था। मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 43 मामलों में 187 लोगों को गिरफ्तार किया था।
आगजनी की इस घटना में भिलाई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ बलौदाबाजार पुलिस ने 449 पेज का विस्तृत अभियोग पत्र तैयार कर न्यायालय में पेश किया था, जिसमें देवेंद्र यादव पर हिंसा, दंगा फैलाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले में बलौदाबाजार पुलिस ने 17 अगस्त को भिलाई स्थित निवास से देवेंद्र यादव को गिरफ्तार किया था।
विधायक देवेंद्र यादव पर लोगों को भड़काने का आरोप है। इस मामले में बलौदाबाजार पुलिस ने 4 बार नोटिस जारी किया, लेकिन विधायक ने बयान देने जाने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस को बयान लेना है, तो उनके पास आए और लेकर जाए।
पूछताछ के लिए तीसरा नोटिस मिलने पर देवेंद्र यादव ने बलौदाबाजार जाकर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात भी की थी। वहीं बलौदाबाजार पुलिस के एक उच्चाधिकारी की माने तो पुलिस के पास देवेंद्र के खिलाफ गवाह हैं। कुछ लोगों के बयान हैं। इसके अलावा पुलिस के पास कुछ वीडियो भी हैं। इसको आधार बनाकर उन पर कार्रवाई की जा रही है।
