बरबाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर लाइन के विस्तार के लिए अब फिर सर्वे शुरू | Survey started again for extension of Barbadih-Chirmiri-Ambikapur line

Share this

बैकुंठपुर9 घंटे पहले

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-2.jpeg
  • कॉपी लिंक

बरबाडीह-चिरमिरी-अम्ब िकापुर रेल लाइन के शुरू होने की एक बार फिर से आस जगी है, लेकिन इस रेल परियोजना के लिए स्थानीय स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। यह प्रयास झारखंड पलामू के सांसद ने की है। उसके बाद अब डीपीआर तैयार करने सर्वे कराया जा रहा है। अंग्रेजों ने छत्तीसगढ़ के चिरमिरी से झारखंड के बरवाडीह तक रेललाइन पर काम शुरू किया था। पुल-पुलियों के साथ रेल पात बिछाने का काम पूरा नहीं हुआ और देश आजाद हो गया। आजाद भारत में यह रेल परियोजना अब तक अधूरी है। चिरमिरी से रेल लाइन अंबिकापुर तक बढ़ चुकी है।

http://durgnews.in/wp-content/uploads/2026/07/SR-Hospital-1.jpeg

1942 में जिस बरबाडीह-चिरमिरी-अम्ब िकापुर रेल परियोजना को अंग्रेजों ने फायदे का मानकर सर्वे शुरू कराया, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से काम शुरू होने की वजह से अधूरा रह गया था, देश आजाद होने के बाद उसी रेल लाइन परियोजना को घाटे का मानकर आज तक पूरा नही किया गया, जबकि इसके लिए कई बार लोगों ने मांग की। जानकारी के अनुसार ब्रिटिश शासन में ही वर्ष 1942 में ही बरवाडीह चिरमिरी रेल लाइन परियोजना की शुरुआत हुई थी।

अब तक चिरमिरी से विश्रामपुर तक 129 किमी रेलखंड वर्ष 1962 से परिचालन में है, वहीं विश्रामपुर से अंबिकापुर तक 19 किलोमीटर रेल लाइन भी पूरी हो गई है। अंबिकापुर से बरवाडीह तक 182 किमी की रेललाइन का काम अब तक अधूरा है। रेलवे मंत्रालय ने बरवाडीह- चिरमिरी रेल लाइन को अव्यवहारिक व नुकसानदायक मान कर उसके निर्माण को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। वर्ष 2011-12 में सांसद इंदर सिंह नामधारी ने भी लोकसभा में अंबिकापुर से बरवाडीह तक 182 किमी अधूरी पड़ी इस परियोजना को पूरा करने की मांग की थी।

एक रुपए टोकन मनी के साथ कई बार मंजूरी दी: आजाद भारत से पहले अंग्रेजों ने जबलपुर, कटनी, अनूपपुर, चिरमिरी रेल लाइन को रांची बरकाकाना, बरवाडीह से जोड़ने की परियोजना तैयार की थी। छत्तीसगढ़ में साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (एसईसीएल), झारखंड में सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड(सीसीएल) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड(बीसीसीएल) की खदानें हैं। दोनों राज्यों से कोयला परिवहन के लिए भी प्रस्तावित रेल लाइन फायदेमंद है। अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद परियोजना अटकी थी। 1960-61 में तत्कालीन रेल मंत्री जगजीवन राम का अंबिकापुर आना हुआ था। क्षेत्रवासियों की मांग पर उन्होंने परियोजना को मंजूरी दी थी।

दो महानगरों के बीच दूरी कम होगी

इसकी मांग कई वर्षों से की जा रही है। प्रस्तावित रेललाइन के अंतिम सर्वे के लिए साढ़े चार करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इससे छत्तीसगढ़ के सीधे झारखंड के रास्ते रांची-कोलकाता से जुड़ने की उम्मीद बढ़ गई है। बरवाडीह से सभी रूट की ट्रेनें है। अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन लाइन के विस्तार से छत्तीसगढ़ और झारखंड का जनजातीय बहुल क्षेत्र सीधे मुंबई, हावड़ा से जुड़ जाएगा। दूसरे रेल मार्गों की अपेक्षा दोनों महानगर की दूरी लगभग चार सौ किलोमीटर कम हो जाएगी।

प्रस्तावित रेल स्टेशन
अंबिकापुर से बरवाडीह के बीच स्टेशन भी प्रस्तावित है। अंग्रेजों के शासनकाल में बरवाडीह की ओर से रेल पात बिछाने और पुल-पुलिया का काम भी शुरू किया था। प्रस्तावित रेल लाइन में अंबिकापुर से आगे परसा, बरियों, राजपुर रोड, कर्रा, पस्ता, झलरिया, दलधोवा, सरनाडीह व झारखंड के बरगढ़, नौकी, बिंदा, पारो, हुतार व बरवाडीह है।

इनके प्रयास से बढ़ा काम
झारखंड पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने कहा कि काफी प्रयास के बाद रेलवे लाइन निर्माण को लेकर डीपीआर बनाने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। इसे बनाने के लिए वर्ष 2014 से ही मामले को लोकसभा में शून्य काल और नियम 377 के तहत उठाते रहने, रेलवे जोन व मंडल की बैठकों में उठाने, विभिन्न स्तरों पर पत्राचार करने के अलावा रेल मंत्री से मुलाकात कर अनुरोध किया। इससे झारखंड, बिहार और राज्यों के संबंधित जिले के लोगों को सुविधा मिलेगी।

1935 से लेकर अब तक 7 बार सर्वे किया: संयोजक
सरगुजा रेलवे संघर्ष समिति के संयोजक वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि 1935 में इस रेल लाइन से अब तक 7 बार इस रेल लाइन का सर्वे हुआ है। 2014 में कांग्रेस सरकार ने एक रूपए टोकन मनी की मंजूरी दी, बाद में एनडीए की सरकार ने 2015 में 5 करोड़ की टोकन मनी दी। अभी काम शुरू हो रहा है, यह सरगुजा संभाग के सभी जिले के लिए मील का पत्थर साबित होगा। बरबाडीह- चिरमिरी- अंबिकापुर के लिए डीपीआर बनाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन इसके साथ चिरमिरी से नागपुर 17 किलोमीटर रेल का विस्तार होना जरूरी है।

खबरें और भी हैं…

Share this
READ MORE  अविमुक्तेश्वरानंद बोले- जोशीमठ की दरार बंद करके चमत्कार दिखाएं, सदानंद ने कहा- ऐसे लोग हिंदू विरोधी | Avimukteshwaranand said - show miracles by closing the cracks of Joshimath, Sadanand said - such people are anti-Hindu