
रायपुर2 घंटे पहलेलेखक: प्रशांत गुप्ता

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अफसर-कर्मियों को जंगल में ट्रेनिंग देते डब्ल्यूडब्ल्यूएफ एक्सपर्ट।
हर चार साल में होने वाली बाघों की गणना पर 29 जुलाई, 2022 को जारी होने वाली अपनी रिपोर्ट को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने ही रोक दिया है। रिपोर्ट क्यों रुकी, इस बारे में भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि एनटीसीए ने छत्तीसगढ़ के एक टाइगर रिजर्व उदंती-सीतानदी में बाघों की गणना के तरीके और रिपोर्ट पर खासी आपत्ति जताई है। इन्वेस्टिगेशन में यह बात सामने आई कि 1,800 वर्ग किमी में फैले इस रिजर्व में बाघों की गिनती के मामले में वन विभाग ने सारे प्रोटोकाॅल का ही उल्लंघन कर दिया। जिन कर्मचारियों से जंगल में कैमरे लगवाए गए, वे प्रशिक्षित नहीं थे। सिर्फ 200 वर्ग किमी में कैमरे लगाए। इन्हें सही जगह, ऊंचाई और दिशा में नहीं लगाया। सिर्फ 100 कैमरे को पर्याप्त नहीं माना गया।

25 दिनों तक कैमरे लगाकर रखने थे, लेकिन इन्हें 10 से 12 दिन में निकाल दिया गया। जो कैमरे लगाए गए, उनसे बाघों की तस्वीरें साफ नहीं अाईं। इस वजह से एनटीसीए ने इस टाइगर रिजर्व के बाघों के आंकड़े को खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट रोक दी। ऐसा मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में हुआ, इसलिए कुल मिलाकर नेशनल रिपोर्ट तक जारी नहीं की गई है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के स्टाफ से भास्कर ने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि कैमरा लगाने का प्रशिक्षण और एप से वीडियो-पिक्चर अपलोड करने की ट्रेनिंग दी जाती तो बेहतर होगा।
अब प्रशिक्षण के बाद 1800 में से 400 वर्ग किमी के कोर एरिया को 3 हिस्से में बांटकर पहले हिस्से में 200 से अधिक कैमरे, फिर इन्हीं कैमरों को अगले 2 हिस्सों में इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसा करके 2 फरवरी तक एनटीसीए को रिपोर्ट दोबारा भेजी जानी है। एनटीसीए ने अचानकमार टाइगर रिजर्व की रिपोर्ट प्रमाणिक मानी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक गणवीर धम्मशील ने बताया कि नक्सल प्रभावित होने के कारण वहां भी केवल 50 प्रतिशत क्षेत्र ही कवर हो पाया है।
छत्तीसगढ़ की पिछली रिपोर्ट खराब, सिर्फ 19 बाघ बचे थे
छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय बाघ गणना की साल 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक 46 बाघ थे, 2018 की गणना में संख्या घटकर 19 रह गई। देशभर में छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट सबसे खराब रही। 27 बाघों की मौत हुई या इनका रिकॉर्ड ही विभाग के पास नहीं था। एनटीसीए की वेबसाइट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में साल 2012 से जुलाई 2022 तक 16 बाघों की मौत हुई।
इसके बाद, बीते 3 साल में राज्य में बाघों के संरक्षण में 14 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। मगर, यह स्पष्ट नहीं है कि बाघ 19 ही हैं, या बढ़ गए? गौरतलब है, एनटीसीए 2010 से देशभर में बाघों की गणना करवा रहा है, जिसे फोर फेस टाइगर मॉनीटरिंग भी कहा जाता है। पहले चरण में पग मार्क, मल और प्रत्यक्ष प्रमाण का सर्वे होता है। दूसरे चरण में डेटा संकलित होता है। तीसरे चरण में ग्रिड पट्टी में कैमरे लगाए जाते हैं। चौथे चरण में डेटा कलेक्ट कर एनटीसीए को भेजा जाता है। इसके जरिए बाघों की संख्या का पता चलता है।

छत्तीसगढ़ में टाइगर रिजर्व के बारे में जाने
2021-22 में बाघों की मौत
- 23 जनवरी नारायणपुर में बाघ की खाल बरामद।
- 12 मार्च बस्तर में एक बाघ की मौत।
- 20 अगस्त भानुप्रतापुर में बाघ की खाल बरामद।
- 25 नवंबर तेंदुआ सर्किल में बाघ की मौत।
- 08 अक्टूबर 22 कांकेर में बाघ की खाल मिली।
- 17 अक्टूबर सूरजपुर में बाघ की खाल बरामद।
*एनटीसीए की वेबसाइट के मुताबिक।
दोबारा ट्रैपिंग होगी- पीसीसीएफ
सर्वे के लिए कैमरे 25 दिन लगाने होते हैं। कुछ जगहों पर 25 दिन तक नहीं लग पाए और पूरा क्षेत्र कवर नहीं हो पाया। इसलिए एनटीसीए ने दोबारा ट्रेपिंग करने के लिए कहा है।
-पीवी नरसिम्हा राव, पीसीसीएफ-वाइल्ड लाइफ
इस बार एरिया कवर- डीएफओ
गणना प्रोटोकाॅल का पालन करने दोबारा स्टाफ को ट्रेनिंग देकर कैमरे लगवा रहे हैं। अचानकमार से अतिरिक्त कैमरे लिए जा रहे हैं। पूरी कोशिश है कि इस बार पूरा एरिया कवर करें।
-वरुण जैन, डीएफओ-उदंती सीतानदी रिजर्व
